चारे का संकटBeed Fodder Crisis: महाराष्ट्र के बीड जिले में इस साल कमजोर मॉनसून ने खेती के साथ पशुधन के सामने भी संकट खड़ा कर दिया है. बीड कलेक्टर कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में 8.55 लाख से अधिक मवेशियों के लिए फिलहाल करीब 100 दिनों का ही चारा उपलब्ध है. जिले के कुछ इलाकों में 25 से 49 दिनों तक बारिश नहीं होने से स्थिति और गंभीर हुई है. प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, अंबाजोगाई में चारे का पर्याप्त भंडार है. वहीं, आष्टी, धारूर, गेवराई, केज, माजलगांव, शिरूर और वडवणी में उपलब्ध चारा करीब 21 से 76 दिनों तक ही चल सकेगा. इससे आने वाले दिनों में पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, कम बारिश का असर खरीफ फसलों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. प्रशासन ने बताया कि जिले के कई तालुकों में फसल उत्पादन सामान्य स्तर के 50 फीसदी से भी नीचे रह सकता है. बारिश की कमी के कारण सोयाबीन, कपास और तुअर की फसलें सूखने लगी हैं.
बीड में करीब 4.01 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन, 2.50 लाख हेक्टेयर में कपास और 48,630 हेक्टेयर में तुअर की खेती हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश नहीं होने से इन प्रमुख फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ा है. लंबे समय तक बारिश की कमी बनी रही तो उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका जताई गई है.
बीड में जून से सितंबर के बीच सामान्य मॉनसून बारिश 566.1 मिलीमीटर मानी जाती है. इसके मुकाबले 20 सितंबर तक जिले में सिर्फ 325.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है. यानी सामान्य औसत की तुलना में जिले को अब तक काफी कम बारिश मिली है.
कम बारिश का असर जिले के जलस्रोतों पर भी पड़ा है. 12 सितंबर तक बीड की 164 सिंचाई परियोजनाओं में कुल 128.08 मिलियन क्यूबिक मीटर लाइव स्टोरेज दर्ज किया गया. यह इन परियोजनाओं की कुल क्षमता का सिर्फ 16.69 फीसदी है.
बारिश की कमी से एक तरफ खरीफ फसलों के सूखने का खतरा बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर चारे और पानी की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है. प्रशासन की रिपोर्ट में मौजूदा स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में फसल उत्पादन और पशुधन के लिए संसाधनों की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई गई है. (पीटीआई)
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