
मध्यप्रदेश की कृषि विरासत और बागवानी क्षेत्र के लिए यह गर्व का क्षण है. राज्य के दो प्रमुख फल उत्पादों सिवनी जम्बो सीताफल और बुरहानपुर केला को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त हुआ है.यह उपलब्धि न केवल दोनों जिलों की विशिष्ट कृषि पहचान को राष्ट्रीय मान्यता दिलाती है, बल्कि हजारों किसानों के लिए बेहतर बाजार, अधिक मूल्य और निर्यात के नए अवसर भी लेकर आई है.
जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान कानूनी रूप से सुरक्षित हो गई है. अब केवल निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र में उत्पादित फल ही इन नामों से बाजार में बेचे जा सकेंगे, जिससे नकली और भ्रामक उत्पादों पर रोक लगेगी.
सिवनी जिले का प्रसिद्ध जम्बो सीताफल अपने बड़े आकार, उत्कृष्ट गुणवत्ता और प्राकृतिक रूप से विकसित होने वाले विशिष्ट मीठे स्वाद के लिए देशभर में जाना जाता है. इस फल का औसत वजन 200 से 650 ग्राम तक होता है, जबकि भूतबंधानी क्षेत्र में उत्पादित कई फल 800 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक वजन के पाए जाते हैं.
सहायक संचालक उद्यानिकी सिवनी डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार के अनुसार उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा कलेक्टर सिवनी और आयुक्त उद्यानिकी के मार्गदर्शन में वर्ष 2023 में भूतबंधानी सीताफल क्रॉप प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के माध्यम से जीआई टैग के लिए आवेदन किया गया था. इसके परिणामस्वरूप सिवनी जम्बो सीताफल को यह महत्वपूर्ण मान्यता प्राप्त हुई.
वर्तमान में सिवनी जिले में लगभग 695 हेक्टेयर क्षेत्र में सीताफल की खेती की जा रही है, जिससे प्रतिवर्ष करीब 6090 मीट्रिक टन उत्पादन प्राप्त होता है.जिले का सीताफल दिल्ली, मुंबई, नागपुर, रायपुर, वाराणसी सहित देश के अनेक प्रमुख बाजारों में विशेष मांग रखता है.
सीताफल का उपयोग पल्प निर्माण में भी किया जाता है, जिससे आइसक्रीम, रबड़ी, बासुंदी, लस्सी, शेक और विभिन्न मिठाइयां तैयार की जाती हैं. इसके अलावा पत्तियों और छिलकों का उपयोग जैविक खाद तथा औषधीय उत्पादों के निर्माण में भी किया जाता है.
जिले में सीताफल उत्पादकों को संगठित कर दो किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाए गए हैं तथा तीन सीताफल पल्प प्रसंस्करण इकाइयां भी स्थापित की गई हैं.
प्रदेश के बुरहानपुर जिले का केला लंबे समय से अपने विशिष्ट स्वाद, आकर्षक रंग और उच्च गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध रहा है. जिले की अनुकूल जलवायु, उपजाऊ भूमि और विशेष भौगोलिक परिस्थितियां इस फसल को अन्य क्षेत्रों के केले से अलग पहचान प्रदान करती हैं.
अधिकारियों के अनुसार बुरहानपुर में वर्ष 1960 के आसपास से व्यावसायिक स्तर पर केले की खेती की जा रही है.वर्तमान में जिले में लगभग 26,120 हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती हो रही है और करीब 18,640 किसान इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. जिले में प्रतिवर्ष लगभग 18.28 लाख टन केले का उत्पादन होता है.
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत बुरहानपुर जिले में 55 से अधिक केला प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं. इन इकाइयों में केले से विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं.
जीआई टैग मिलने के बाद बुरहानपुर केले की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अलग पहचान बनेगी. इससे उत्पाद की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूती मिलेगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने से दोनों उत्पादों की बाजार विश्वसनीयता बढ़ेगी.इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर प्रसंस्करण उद्योग, रोजगार और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा.
जीआई टैग के कारण उत्पादों की गुणवत्ता और मौलिकता की सुरक्षा सुनिश्चित होगी तथा अन्य क्षेत्रों के उत्पादक इन नामों का उपयोग नहीं कर सकेंगे. इससे स्थानीय उत्पादकों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त होगा.
मध्यप्रदेश के कई विशिष्ट कृषि एवं खाद्य उत्पाद पहले ही जीआई टैग प्राप्त कर चुके हैं. इनमें रतलामी सेव, कड़कनाथ चिकन, रियावन लहसुन, चिन्नौर चावल, सुंदरजा आम, मालवी गराड़ू, सैलाना की बालम ककड़ी और मालवी आलू प्रमुख हैं.
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