दुनिया भर में मखाने का डंका: 5 साल में एक्सपोर्ट 4 गुना पार, लेकिन फिर क्यों लगा तगड़ा झटका?  

दुनिया भर में मखाने का डंका: 5 साल में एक्सपोर्ट 4 गुना पार, लेकिन फिर क्यों लगा तगड़ा झटका?  

दुनिया भर में इस मखाना सुपरफूड का डंका बज रहा है. पिछले 5 सालों में इसका एक्सपोर्ट 4 गुना पार कर गया था.लेकिन,अचानक इसकी तेज़ रफ़्तार पर बड़ा ब्रेक लग गया है.विदेशी बाज़ार में टैक्स और गिरती कीमतों से कारोबारियों को तगड़ा झटका लगा.ऐसे मुश्किल वक्त में हमारे देसी बाज़ार की बम्पर डिमांड ने इस कारोबार को भारी नुकसान से बचा लिया.अब आगे का मुनाफ़ा पूरी तरह बेहतरीन क्वालिटी और सही वेयरहाउस मैनेजमेंट पर ही टिका हुआ है.

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दुनिया भर में मखाने का डंका: 5 साल में एक्सपोर्ट 4 गुना पार, लेकिन फिर क्यों लगा तगड़ा झटका?  मखाना बिज़नेस

आजकल पूरी दुनिया में भारत के मखाने का डंका बज रहा है और इसकी डिमांड आसमान छू रही है. कभी सिर्फ मिथिला के शांत पोखरों और छोटे बाज़ारों तक सीमित रहने वाला यह नाज़ुक सा मखाना आज एक धाकड़ ग्लोबल सुपरफूड बन चुका है. एपिडा की शानदार रिपोर्ट के आंकड़े गवाही देते हैं कि पिछले पांच सालों में भारत से मखाने के एक्सपोर्ट  में लगभग चार गुना का ज़बरदस्त उछाल आया है. साल 2020 में भारत ने दुनिया भर में महज़ 6,700 टन मखाना भेजा था, जो साल 2024 आते-आते 39% की तेज़ रफ़्तार  से बढ़कर 25,130 टन के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.

अमेरिका, कनाडा, यूएई , यूके  और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इसके सबसे बड़े दीवाने बन चुके हैं. भारत से एक्सपोर्ट होने वाले कुल मखाने का 40% हिस्सा अकेले अमेरिका खरीदता है, जबकि कनाडा 20% और यूएई 17% हिस्सेदारी रखते हैं. इन बेहतरीन आंकड़ों को देखकर ऐसा लग रहा था मानो मखाने का यह शानदार बिज़नेस अब कभी पीछे मुड़कर नहीं देखेगा. 

आखिर क्यों हुआ निर्यात गिरा?

मखाना एक्सपोर्ट की इस तेज़ रफ़्तार बुलेट ट्रेन को साल 2025 में अचानक एक ज़बरदस्त ब्रेक लग गया. लगातार आसमान छूने के बाद, मखाने का एक्सपोर्ट औ 'धड़ाम' से नीचे आ गिरीं. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़, अप्रैल 2025 से मार्च 26 तक सिर्फ 7626 टन मखाना ही एक्सपोर्ट हो पाया है, जो पिछले साल के मुक़ाबले एक बड़ी गिरावट का सीधा इशारा है. इस अचानक आई गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े टैरिफ और इंटरनेशनल मार्किट में कीमतों का भारी दबाव  रहा है. अमेरिका जो हमारा सबसे बड़ा 40% खरीदार था, वहां से डिमांड और मुनाफ़े पर सीधा असर पड़ा.

इसके अलावा, एक्सपोर्ट की कीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई; जहां मई 2025 में मखाने का एक्सपोर्ट रेट 20.3 डॉलर प्रति किलो था, वह अगस्त 2025 तक गिरकर 15.5 डॉलर प्रति किलो पर आ गया. इस  झटके ने कई बड़े एक्सपोर्टर्स को गहरी चिंता में डाल दिया और उन्हें नए विदेशी बाज़ारों की तलाश करने पर मज़बूर कर दिया. 

घरेलू बाजार बना तारणहार

जब विदेशी बाज़ारों में एक्सपोर्ट का ग्राफ बुरी तरह से नीचे गिर रहा था, तब भारत के अपने घरेलू बाज़ार ने इस बिज़नेस के लिए एक सच्चे तारणहार और संजीवनी का काम किया. मज़ेदार बात यह है कि भारत के अंदर मखाने की डिमांड और कीमतें एक्सपोर्ट की तरह बिल्कुल धड़ाम नहीं हुईं, बल्कि और भी ज्यादा मज़बूती से ऊपर चढ़ीं. देश में लोग अब अपनी सेहत को लेकर बहुत ज्यादा जागरूक हो गए हैं और मखाने को एक प्रीमियम हेल्दी स्नैक के रूप में खूब पसंद कर रहे हैं.

इसी भारी डिमांड की वजह से भारत में मखाने की कीमतें, जो साल 2020 में 500 रुपये प्रति किलो हुआ करती थीं, वो 2025 में छलांग लगाकर सीधे 1250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं. भारत का अपना मखाना बाज़ार 2021-22 के 5000-5500 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 8000-8500 करोड़ रुपये का एक विशाल बाज़ार बन गया है. इसी मज़बूत घरेलू डिमांड ने किसानों और कारोबारियों को एक्सपोर्ट के उस भारी झटके से काफी हद तक महफूज़ रखा. 

अब सामने है सबसे बड़ी चुनौती

 भले ही देश के अंदर डिमांड बहुत अच्छी हो और घरेलू बाज़ार कारोबारियों को मुनाफ़ा दे रहा हो, लेकिन इस बिज़नेस को लंबे वक़्त तक ज़िंदा रखने के लिए अब एक बहुत बड़ी और गंभीर चुनौती सामने खड़ी है. यह चुनौती सिर्फ मखाना उगाने या उसे मार्केट में बेचने की नहीं है, बल्कि उस कीमती माल को सुरक्षित रखने यानी वेयरहाउस  के सही मैनेजमेंट की है. मखाना एक बहुत ही नाज़ुक किस्म का प्रोडक्ट होता है.

देश के जाने-माने वैज्ञानिक और 'मखाना मैन ऑफ़ इंडिया'  आईसीएआर के  पूर्व डीडीजी डॉ. एस. एन. झा का भी स्पष्ट रूप से यही मानना है कि आपका वेयरहाउस सिर्फ माल रखने का एक कमरा नहीं है, बल्कि यह आपके पूरे बिज़नेस की सबसे मज़बूत रीढ़ की हड्डी  है. अगर आपने लाखों रुपये का माल खरीद कर रख लिया, लेकिन उसे गोदाम में रखने का तरीका गलत है, तो वो सारा बेशकीमती माल पल भर में मिट्टी के भाव हो सकता है. क्वालिटी से किया गया कोई भी छोटा सा समझौता विदेशी बाज़ारों के साथ-साथ आपके पक्के घरेलू ग्राहकों को भी आपसे हमेशा के लिए दूर कर सकता है.

अगर चूके, तो लाखों का नुकसान

गोदाम में रखी मखाने की बोरियों का सबसे बड़ा दुश्मन हवा की नमी  और साफ़-सफाई की कमी है. मखाना अपने आस-पास के माहौल से बहुत ही तेज़ी से सीलन सोख लेता है. अगर आपके वेयरहाउस में थोड़ी सी भी नमी या सीलन मौजूद है, तो आपका शानदार और कुरकुरा मखाना बिल्कुल नरम पड़ जाएगा और उसका लज़ीज़ ज़ायका पूरी तरह से खराब हो जाएगा. बाज़ार में नरम माल कोई भी डिस्ट्रीब्यूटर या ग्राहक खरीदना पसंद नहीं करता. इसके अलावा, चूहे, कीड़े-मकोड़े और धूल-मिट्टी भी आपके माल को बुरी तरह बर्बाद कर सकते हैं.

इस भारी आर्थिक नुकसान से बचने के लिए गोदाम को हमेशा एकदम सूखा, साफ़ और पूरी तरह से हवादार  रखना बहुत ज़रूरी है. मखाने की बोरियों को कभी भी सीधे फर्श पर ना रखें, इनकी हिफ़ाज़त के लिए हमेशा लकड़ी के पैलेट्स का ही इस्तेमाल करें. साथ ही, अपनी इन्वेंट्री को अच्छे से मैनेज करने के लिए FIFO (First In, First Out) यानी "जो पहले आया, वो पहले जाएगा" के सुनहरे नियम को सख्ती से लागू करें ताकि पुराना माल हमेशा ताज़ा रहते हुए बाज़ार में निकल जाए।

स्मार्ट प्लानिंग से मिलेगी कामयाबी

अगर हमें मखाने को हमेशा के लिए एक हिट ग्लोबल और नेशनल ब्रांड बनाए रखना है और भविष्य में अचानक आने वाले 'धड़ाम' जैसे किसी भी झटके से बचना है, तो हमें काम करने के अपने तौर-तरीकों को तेज़ी से बदलना होगा. वेयरहाउस मैनेजमेंट में मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना अब कोई लग्ज़री या शौक नहीं रहा, बल्कि यह आज के वक़्त की सबसे बड़ी ज़रूरत बन चुका है. गोदाम में तापमान और नमी नापने वाले स्मार्ट सेंसर्स बेहतरीन इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके हम अपने माल की 24 घंटे पुख्ता हिफ़ाज़त कर सकते हैं.

इसके अलावा, अमेरिका जैसे सिर्फ एक देश पर अपनी पूरी निर्भरता कम करके हमें यूरोप दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे नए देशों में अपने लिए बेहतरीन बाज़ार तलाशने होंगे. त्यौहारों और व्रत के सीज़न में बाज़ार की भारी डिमांड को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए अपने वेयरहाउस को हमेशा पहले से तैयार रखना होगा. अगर माल की क्वालिटी टॉप क्लास रहेगी और हिफ़ाज़त शानदार होगी, तो मखाने का यह बेहतरीन बिज़नेस हमेशा नई बुलंदियों को छूता रहे.

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