झारखंड में मॉनसून की दस्तक के बीच इस तरह करें धान की खेती, पढ़ें आईएमडी की सलाह

झारखंड में मॉनसून की दस्तक के बीच इस तरह करें धान की खेती, पढ़ें आईएमडी की सलाह

किसानों के लिए जारी सामान्य सलाह में कहा गया है कि विभिन्न खरीफ फसलों की बुवाई का समय 30 जून तक है. राज्य में 30 जून से 1 जुलाई तक मॉनसून के प्रवेश करने की उम्मीद है. इसलिए तब तक किसान अपने धान के बिचड़े और सब्जियों में सिंचाई करते रहें.

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झारखंड में मॉनसून की दस्तक के बीच इस तरह करें धान की खेती, पढ़ें आईएमडी की सलाहझारखंड में धान की खेती के लिए सलाह (सांकेतिक तस्वीर)

झारखंड में भी मॉनसून के आने का संकेत मिल चुका है. इसके साथ ही यहां पर भी किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट जाएंगे. मौसम विभाग का अनुमान है कि 29-30 जून से पूरे झारखंड में मॉनसून की बारिश शुरू हो जाएगी. इसे लेकर मौसम विभाग की तरफ से किसानों के लिए सलाह जारी की गई है. इन सलाहों को मानकर किसान अच्छी खेती कर सकते हैं और बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं. किसानों के लिए जारी सामान्य सलाह में कहा गया है कि विभिन्न खरीफ फसलों की बुवाई का समय 30 जून तक है. राज्य में 30 जून से 1 जुलाई तक मॉनसून के प्रवेश करने की उम्मीद है. इसलिए तब तक किसान अपने धान के बिचड़े और सब्जियों में सिंचाई करते रहें.

जिन किसानों के पास ऊपरी और मध्यम जमीन है और उसमें खेती करते हैं तो उसमें फसलों की बुवाई जारी रखें. धान की फसल को छोड़कर अन्य सभी फसलों की बुवाई मेड़ बनाकर ही करें. जिन खेतों में किसान धान की रोपाई करेंगे, उन खेतों की मेड़ों को अभी से ही दुरुस्त करें ताकि उसमें जलजमाव हो सके और खेत रोपाई के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सके. किसान चाहें तो खेत में एक या दो बार जुताई भी कर दें. इससे जल जमाव अच्छे से होगा. जिन खेतों में किसान सब्जियों की खेती कर रहे हैं या मक्के की खेती कर रहे हैं, उन खेतों में जल निकासी के लिए अच्छी व्यवस्था करें. बारिश के पानी को जमा करने के लिए किसान अपने खेत के निचले हिस्से में 10 फीट लंबा, 10 फीट चौड़ा और 10 फीट गहरा गड्ढा बना दें. यहां के पानी का इस्तेमाल किसान खरीफ सीजन या रबी सीजन में सिंचाई के लिए कर सकते हैं. 

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शुरू करें धान की रोपाई

जिन किसानों ने धान का बिचड़ा लगाया है और वह अगर 20-25 दिन का हो गया है तो आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने पर खेत में उसकी रोपाई कर सकते हैं. जिन किसानों ने लंबी अवधि वाले धान के किस्मों की खेती की है, उन किसानों को ध्यान रखना होगा कि उनकी रोपाई पहले खेत में कर लें. जिन किसानों ने दो बार में नर्सरी तैयार की है वो किसान पहले तैयार की गई नर्सरी से धान के पौधों को उखाड़कर पहले रोपाई करें. फिर बाद में तैयार किए गए नर्सरी का बिचड़ा निकालें. बिचड़ा उखाड़ने से पहले खेत में अच्छे से जलजमाव होने दें. इससे बिचड़ा उखाड़ने में आसानी होगी और वो नहीं टूटेंगे.

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इतनी मात्रा में मिलाएं खाद

किसानों को सलाह दी जाती है कि धान की रोपाई के लिए खेत तैयार करते समय खेत में प्रति एकड़ की दर से 25 किलोग्राम यूरिया, 32 किलोग्राम डीएपी और 20 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश डालें. खेत में दो से तीन बिचड़े की रोपाई कतार में करें. इस दौरान कतार से कतार की दूरी 20 सेंटीमीटर रखें और पौधे से पौधे की दूरी 15 सेंटीमीटर रखें. पौधों को कम गहराई में रोपें. किसानों को सलाह दी जाती है कि पर्याप्त बारिश होने के बाद धान की रोपाई से पहले 12 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से ढैंचा के बीज की बुवाई खेत में करें ताकि धान की रोपाई से 10-15 दिन पहले ढैंचा की फसल 3-4 सप्ताह पुरानी हो जाए. इस हरी खाद से खरीफ की खेती को फायदा होगा.  

 

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