
वैज्ञानिक तरीका अपनाने से बढ़ी मिर्च की पैदावार (फोटो- एएनआई)गुजरात के राजकोट क्षेत्र में मिर्च की खेती करने वाले किसान अब पारंपरिक बुवाई पद्धति को छोड़कर वैज्ञानिक नर्सरी तकनीक अपना रहे हैं. खेती के इस नए मॉडल से पौधों की गुणवत्ता बेहतर हो रही है, फसल का जीवित रहने का प्रतिशत बढ़ रहा है और उत्पादन में भी सुधार देखने को मिल रहा है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में भी मदद कर रहा है. मिर्च उत्पादन को आधुनिक बनाने के लिए किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है.
नर्सरी विकास, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों को अपनाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. इन सुविधाओं की वजह से किसान कम लागत में बेहतर प्रबंधन के साथ खेती कर पा रहे हैं और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार आ रहा है.
राजकोट के उद्यानिकी अधिकारी पीयूष वागड़िया ने बताया कि किसानों को स्वरोजगार आधारित नर्सरी स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके तहत छोटी नर्सरी इकाई स्थापित करने पर कुल लागत का 65 प्रतिशत तक वित्तीय सहयोग दिया जाता है, जो करीब 3 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. इसके अलावा पौध तैयार करने के लिए जरूरी उपकरणों की किट भी योजना में शामिल की गई है, ताकि किसान आसानी से वैज्ञानिक तरीके से पौध तैयार कर सकें.

उन्होंने आगे बताया कि सरकार की ओर से मल्चिंग तकनीक को बढ़ावा देने के लिए भी सब्सिडी दी जा रही है. अगर किसी यूनिट की लागत 40 हजार रुपये है तो उसमें 50 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 15 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करती है. वहीं, ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने वाले किसानों को भी सहायता मिल रही है. इससे पानी की बचत होने के साथ फसल को आवश्यक नमी लगातार मिलती रहती है.
किसान प्रतीक पटेल ने बताया कि ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों ने मिर्च की खेती को ज्यादा फायदेमंद बनाया है. सरकारी मदद मिलने से इन तकनीकों को अपनाना आसान हुआ है और उत्पादन में भी सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है. मल्चिंग के इस्तेमाल से खरपतवार नियंत्रण, नमी संरक्षण और बेहतर विकास में मदद मिल रही है.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक नर्सरी प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई व्यवस्था और उन्नत खेती तकनीकों के कारण राजकोट का मिर्च उत्पादन क्षेत्र तेजी से मजबूत हो रहा है. इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ किसानों की आय बढ़ने की संभावना भी मजबूत हुई है. साथ ही खेती से जुड़े कार्यों में रोजगार के अवसर बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल रहा है. (एएनआई)
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