
मक्का की बुवाई (AI- तस्वीर)खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही देशभर के किसान मक्का की खेती की तैयारियों में जुट गए हैं. लेकिन बदलते मौसम, बेमौसम बारिश और जलभराव की बढ़ती समस्या किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. ऐसे में किसानों की मदद के लिए बिहार कृषि विभाग लगातार आधुनिक और वैज्ञानिक खेती तकनीकों को बढ़ावा दे रहा है. इसी कड़ी में कृषि विभाग ने मक्का की खेती के लिए मेड़ विधि (Ridge Method) को बेहद लाभकारी बताया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान सही तरीके से मेड़ विधि अपनाएं, तो वे कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं वे 7 महत्वपूर्ण तरीके, जिनकी मदद से किसान आसानी से मेड़ विधि से मक्का की सफल खेती कर सकते हैं.
1. अधिक बारिश में भी फसल रहेगी सुरक्षित: मेड़ विधि से मक्का की बुवाई करने पर खेत में पानी जमा नहीं होता, इससे ज्यादा बारिश होने पर भी फसल जलभराव से बची रहती है और पौधों की जड़ें खराब नहीं होती हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से फसल को नुकसान कम होता है और पौधों की बढ़वार बेहतर होती है.
2. बेड प्लांटर मशीन से करें बुवाई: कृषि विभाग के अनुसार किसान मेड़ विधि से मक्का की बुवाई के लिए बेड प्लांटर मशीन का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस मशीन की मदद से बुवाई जल्दी और आसान तरीके से होती है. साथ ही बीज सही दूरी और गहराई पर बोए जाते हैं, जिससे फसल की बढ़वार अच्छी होती है. इस तकनीक से किसानों का समय बचता है और मजदूरी का खर्च भी कम होता है.
3. प्रति एकड़ 10 किलो बीज पर्याप्त: मेड़ विधि से मक्का की बुवाई करने के लिए प्रति एकड़ लगभग 10 किलो बीज पर्याप्त माना जाता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सही मात्रा में बीज का उपयोग करने से पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है, जिससे उनकी बढ़वार अच्छी होती है. इससे फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन बढ़ने की संभावना भी अधिक रहती है.

4. खेत की अच्छी तैयारी जरूरी: मक्का की अच्छी पैदावार के लिए बुवाई से पहले खेत की सही तैयारी करना बहुत जरूरी है. किसान खेत की अच्छी तरह जुताई करें, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए और बीज का अंकुरण बेहतर तरीके से हो सके. कृषि विभाग की सलाह है कि जुताई के समय प्रति एकड़ करीब 30 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) का प्रयोग करें. इससे फसल को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और फसल की बढ़वार अच्छी होती है.
5. बुवाई के समय डालें DAP: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मक्का की बुवाई के समय प्रति एकड़ करीब 50 किलो डीएपी (DAP) का इस्तेमाल करना चाहिए. इसे मशीन की मदद से बीज के साथ डालने पर पौधों को शुरुआत से ही जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं. इससे जड़ें मजबूत बनती हैं, और पौधों की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है.
6. खरपतवार नियंत्रण का रखें ध्यान: मक्का की अच्छी पैदावार के लिए खेत को खरपतवार मुक्त रखना बहुत जरूरी है. अगर समय पर खरपतवार नियंत्रण नहीं किया जाए, तो ये फसल के पोषक तत्व और नमी को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बुवाई के 15 से 20 दिन बाद प्रति एकड़ टेम्बोट्रिओन 115 मिलीलीटर और एट्राजिन 500 ग्राम का छिड़काव करना चाहिए. इससे खेत में खरपतवार नियंत्रित रहते हैं.
7. समय पर करें यूरिया का प्रयोग: मक्का की अच्छी पैदावार के लिए समय पर यूरिया डालना जरूरी है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बुवाई के 20-25 दिन बाद 40 किलो यूरिया, 45-50 दिन बाद 50 किलो यूरिया और 65-70 दिन बाद 25 किलो यूरिया प्रति एकड़ का प्रयोग करें. सही समय पर खाद देने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन बढ़ने में मदद मिलती है.
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