बढ़ती गर्मी और लू से मधुमक्खी पालन पर संकट, विशेषज्ञों ने बताए बचाव के आसान उपाय

बढ़ती गर्मी और लू से मधुमक्खी पालन पर संकट, विशेषज्ञों ने बताए बचाव के आसान उपाय

देश में तेज गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव से मधुमक्खी पालन प्रभावित हो रहा है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि देखभाल में लापरवाही से कॉलोनियां कमजोर हो सकती हैं और शहद उत्पादन घट सकता है.

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बढ़ती गर्मी और लू से मधुमक्खी पालन पर संकट, विशेषज्ञों ने बताए बचाव के आसान उपायमधुमक्खी पालन पर गर्मी का असर

देश में लगातार बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप ने अब खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन (एपिकल्चर) पर भी गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल अल-नीनो प्रभाव के कारण मॉनसून सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है, जिससे तापमान में बढ़ोतरी और सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं. इसका सीधा असर मधुमक्खियों और शहद उत्पादन पर पड़ रहा है.

उत्तर भारत में मार्च से ही तापमान बढ़ना शुरू हो जाता है और मई-जून में यह कई बार 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इतनी अधिक गर्मी मधुमक्खियों के लिए बेहद हानिकारक साबित होती है. इस दौरान फूलों से मिलने वाला मकरंद (नेक्टर) भी घट जाता है और पानी की कमी के कारण शहद उत्पादन प्रभावित होता है. विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस समय मधुमक्खियों की सही देखभाल न की जाए तो कॉलोनियां कमजोर हो जाती हैं और उत्पादन में भारी गिरावट आती है.

हिसार कृषि विश्वविद्यालय (HAU) में कीट विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुनीता यादव के मुताबिक, गर्मियों में मधुमक्खियों को बचाने के लिए सबसे जरूरी है कि छत्तों का तापमान नियंत्रित रखा जाए. उन्होंने बताया कि मधुमक्खियां जब अधिक गर्मी महसूस करती हैं तो अपनी ऊर्जा ठंडक बनाए रखने में ही खर्च करने लगती हैं, जिससे उनके काम करने की क्षमता और शहद संग्रहण प्रभावित होता है.

छाया और स्थान का विशेष ध्यान

विशेषज्ञों का सुझाव है कि गर्मी की शुरुआत में ही मधुमक्खी कॉलोनियों को छायादार स्थानों पर हटा देना चाहिए. पेड़ों के नीचे छत्ते रखना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है. यदि प्राकृतिक छाया उपलब्ध न हो तो फूस, टाट या अस्थायी शेड बनाकर भी बचाव किया जा सकता है. वहीं, शहतूत जैसे पौधे लगाने से छाया के साथ-साथ मकरंद भी उपलब्ध होता है.

पानी की उपलब्धता जरूरी

एचएयू के कुलपति प्रो. काम्बोज ने बताया कि मधुमक्खी पालन स्थल के पास स्वच्छ और ताजा पानी की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए. मधुमक्खियां पानी का उपयोग शहद को पतला करने, बच्चों को खिलाने और छत्ते का तापमान बनाए रखने के लिए करती हैं. बहता पानी सबसे उपयुक्त माना जाता है, जबकि टंकी या मिट्टी के कटोरे भी विकल्प हो सकते हैं. गंदे पानी से बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए साफ पानी देना बेहद जरूरी है.

हवा के झोंके और भीड़ नियंत्रण पर जोर

गर्मी के मौसम में छत्तों के अंदर उचित हवा का प्रवाह बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है. इसके लिए छत्ते का प्रवेश द्वार खुला रखना, लकड़ी के छोटे टुकड़ों से जगह बनाना और फ्रेम की संख्या संतुलित रखना जरूरी है. बताया गया है कि छत्तों में भीड़ नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे तापमान बढ़ जाता है. भीगे बोरे की पल्लियां रखने से तापमान नियंत्रित करने में मदद मिलती है, हालांकि बारिश के मौसम में इस उपाय से बचना चाहिए.

लापरवाही से बढ़ेगा नुकसान

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इन उपायों को नजरअंदाज किया गया तो मधुमक्खियों की सेहत पर बुरा असर पड़ेगा और शहद उत्पादन में गिरावट आएगी. इससे किसानों और मधुमक्खी पालकों दोनों की आय प्रभावित होगी.

क्या करें किसान

बढ़ती गर्मी और लू के बीच मधुमक्खी पालन एक चुनौती बनता जा रहा है. हालांकि, वैज्ञानिक तरीकों और थोड़ी सावधानी से इस संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. छाया, पानी, हवा और उचित प्रबंधन से मधुमक्खियों को सुरक्षित रखकर शहद उत्पादन को बनाए रखा जा सकता है.

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