
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में इस बार मानसून की धीमी रफ्तार और सामान्य से काफी कम बारिश ने खरीफ सीजन की खेती को प्रभावित किया है. जिले में अब तक सामान्य बारिश का लगभग 50 प्रतिशत ही पानी गिरा है.ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों को मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए खेती में कम दिन वाली किस्मों को अपनाने की सलाह दी है. विभाग का कहना है कि किसान कम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों को अपनाकर पानी, समय और खेती की लागत तीनों की बचत कर सकते हैं. साथ ही फसल विविधीकरण और आधुनिक सिंचाई तकनीकों का उपयोग कर नुकसान के जोखिम को भी कम किया जा सकता है.
कृषि विभाग ने किसानों को 90 से 110 दिन और 110 से 130 दिन में तैयार होने वाली धान की किस्मों की सीधी बुवाई करने की सलाह दी है. इनमें एमटीयू-1010, आईआर-64, एमटीयू-1156, एमटीयू-1153, विक्रम और टीसीआर जैसी किस्में शामिल हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार सीधी बुवाई से लगभग 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है. इससे खेत तैयार करने और रोपाई पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है. किसानों की करीब 5 हजार रुपये प्रति एकड़ तक लागत घट सकती है, जबकि फसल सामान्य रोपाई की तुलना में 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है.
किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है जिनकी खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है.अधिकारियों का कहना है कि पर्याप्त बारिश होने के बाद ही धान की रोपाई करें, ताकि बाद में पानी की कमी से फसल खराब होने का खतरा न रहे.
कृषि विभाग ने किसानों से केवल धान पर निर्भर न रहने की अपील की है. विभाग के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में तिल और उड़द जैसी फसलें किसानों के लिए अधिक सुरक्षित और लाभदायक विकल्प हो सकती हैं. जिन किसानों के पास सीमित सिंचाई सुविधा उपलब्ध है, वे सब्जियों की खेती कर अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकते हैं.
किसानों को धान के बजाय कोदो, कुटकी, रागी, मूंग, उड़द, अरहर, मक्का और तिलहन जैसी कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती करने की सलाह दी गई है.
राज्य सरकार भी फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए कृषक उन्नति योजना के तहत ऐसी खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता राशि उपलब्ध करा रही है.
पानी की कमी को देखते हुए सरकार किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए 60 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है. इन आधुनिक तकनीकों से कम पानी में भी फसलों की सिंचाई प्रभावी ढंग से की जा सकती है.
कृषि विभाग ने किसानों को फसलों में मल्चिंग का उपयोग करने की भी सलाह दी है. इससे मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनी रहती है, पानी का कम उपयोग होता है और सूखे जैसी परिस्थितियों में भी फसल को बेहतर सुरक्षा मिलती है.
अल नीनो और कम बारिश जैसी परिस्थितियों में फसल नुकसान की आशंका को देखते हुए किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराने की अपील की गई है. किसान अपने नजदीकी लोक सेवा केंद्र, बैंक शाखा या ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के माध्यम से फसल बीमा करा सकते हैं.
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