गेहूं में हो सकता है झुलसा रोग का प्रकोप, खेतों की लगातार निगरानी करें छत्तीसगढ़ के किसान

गेहूं में हो सकता है झुलसा रोग का प्रकोप, खेतों की लगातार निगरानी करें छत्तीसगढ़ के किसान

इस वक्त गेहूं की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप हो सकता है. ऐसे में लगातार खेत की निगरानी करते रहें. झुलसा रोग का प्रकोप होने पर पौधे के पत्तियों में भूूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं

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गेहूं में हो सकता है झुलसा रोग का प्रकोप, खेतों की लगातार निगरानी करें छत्तीसगढ़ के किसानशीतलहर और ठंड गेहूं की फसल के लिए है लाभदायक. (सांकेतिक फोटो)

छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए कृषि से संबंधित सलाह जारी किया गया है.ताकि मौसम में हो रहे बदलाव के कारण किसानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हो और उन्हें अच्छी उपज हासिल हो सके. सामान्य सलाह जारी करते हुए बताया गया है कि इस वक्त आम की पेड़ों में मंजर आना शुरू हो गया है. जिन पेड़ों में 50 प्रतिशत मंजर हो गया है उन पेड़ों में 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहें. लगातार सिंचाई करने से मंजर और पत्तियों को फायदा होता है. इसके साथ ही किसानों को एसएमएस के जरिए एडवाइजरी जारी की गई है. जिसमें कहा गया है कि अगर डेयरी पशुओं में गैस्ट्रिक की समस्या हो रही है तो टेम्पोल या ब्लोटासिल को 100 मिलीलीचर गर्म पानी में घोलकर पिलाएं. इसके साथ ही यह कहा गया है कि जो किसान पशुओं के लिए चारा की खेती करते हैं वो उन्हें पौष्टिक चारा देने के लिए फूल आने से पहले फसल की कटाई कर दें. 

इस वक्त गेहूं की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप हो सकता है. ऐसे में लगातार खेती की निगरानी करते रहे. झुलसा रोग का प्रकोप होने पर पौधे के पत्तियों में भूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं . इससे बचाव के लिए पौधों में कॉपर ऑक्सीक्लोराइ़ को तीन ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. इसके साथ ही मौसम साफ रहने पर ही कीटनाशसक या फफूंदनाशक का छिड़काव करें. खेतों में बड़े कीट के निगरानी और नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करें. इसके साथ ही अगर संक्रमण अधिक हो तो एनपीवी कीटनाशक का छिड़काव प्रति हेक्टेयर में 500 लीटर पानी की दर से करें. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खेत की लगातार निगरानी करें और यदि ऐसा हो तो उपरोक्त कीटनाशक या वकनाशी का छिड़काव करें.

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एफिड्स के कंट्रोल के लिए करें उपाय

इस समय सरसों की खेती में एफिड्स कीट का प्रकोप हो सकता है. सरसों की फसल का एफिड कीट निम्फ और वयस्क दोनों अवस्था में हानिकारक होता है. सरसों में एफिड्स  को कंट्रोल करने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. को 250 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए. फसल को देखते हुए आवश्यकतानुसार 10-15 दिन के अंतराल पर 2 से 3 बार छिड़काव करें. इसके साथ ही पौधों में अगर सफेद रतुआ या डाउनी फफूंदी का प्रकोप दिखाई दें तो मेटालैक्सिल 1 ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करें. यदि आवश्यक हो तो 10-12 दिन बाद छिड़काव दोहराना चाहिए.

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आलू की खेती में हो सकता है झुलसा रोग का प्रकोप

वर्तमान मौसम की स्थिति को देखते हुए सब्जियों की फसलों में माहू के प्रकोप की आशंका है. इसलिए,किसानों को सलाह दी जाती है कि वे निरंतर निगरानी करें और प्रारंभिक प्रकोप दिखाई देने पर नीम आधारित कीटनाशकों का छिड़काव करें. आलू की अगेली और पछेती खेती में झुलसा रोग को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का 3 ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करें. लीफ कैटर पिलर पर नियंत्रण के लिए सब्जी किसानों को सलाह दी जाती है कि वे 150 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से स्पाइनोशेड का छिड़काव करें.केले और पपीते के पौधों की सप्ताह में एक बार सिंचाई करें और फूल आने के समय केले के पौधे को सहारा दें. 

 

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