
पशुपालन छोटा हो या बड़ा, अगर उसे नुकसान से बचाकर मुनाफे वाला बनाना है तो बीमारियों को कंट्रोल करते हुए पशुओं को हर तरह की परेशानी से बचाना होगा. और एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक ये सब मुमकिन होगा बायो सिक्योरिटी और साफ-सफाई से. यही वजह है कि एक्सपर्ट गाय-भैंस का दूध निकालने के तरीके पर भी बहुत जोर देते हैं. यहां तक कहा जाता है कि अगर मुमकिन हो तो पशुओं का दूध निकालने के लिए मशीन का इस्तेमाल करें. इसी को देखते हुए एक्सपर्ट मशीन से दूध निकालने के फायदों के साथ-साथ ये भी बताते हैं कि मशीन का इस्तेमाल कब और किन्हें करना चाहिए.
डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि संक्रमण के चलते पशुओं को कई तरह की बीमारियां होती हैं. ऐसी ही एक बीमारी थनैला है. ये बीमारी गलत ढंग से पशु का दूध निकालने और साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखने की वजह से होती है. इसलिए पशुओं को संक्रमण से बचाने के लिए जरूरत के मुताबिक मिल्किंग मशीन (Milking Machine) का इस्तेमाल और ज्यादा जरूरी हो जाता है.
हाथ से दूध निकालने में काफी समय और मेहनत लगती है. मशीन की मदद से आप एक ही समय में कई पशुओं का दूध निकाल सकते हैं. हाथ से दूध निकालने में जहां 10-15 मिनट लगते हैं, मशीन वही काम 5-7 मिनट में कर देती है.
डेयरी की एक बड़ी परेशानी ट्रेंड और अच्छे स्टाफ का न मिलना भी है. वैसे भी आजकल अच्छे और कुशल ग्वालों का मिलना मुश्किल हो गया है. लेकिन मिल्किंग मशीन आने के बाद मजदूरों की कमी होने पर भी अपना काम खुद आसानी से संभाला जा सकता है. इससे लेबर का खर्च भी कम होता है.
हाथ से दूध निकालते समय धूल, बाल और पसीने की बूंद दूध में गिरने का डर लगातार बना रहता है. मशीन एक 'क्लोज्ड सिस्टम' है, जिसमें दूध सीधे थनों से पाइप के जरिए बाल्टी या टैंक में जाता है. इससे दूध एकदम साफ रहता है और उसकी क्वालिटी भी बनी रहती है.
अच्छी क्वालिटी की मिल्किंग मशीन प्राकृतिक तरीके से जैसे बछड़ा दूध पीता है ऐसे थनों पर दबाव डालती है. इससे पशु को दर्द भी नहीं होता और वह तनाव मुक्त होकर पूरा दूध देता है. इससे थनों में गांठ बनने या चोट लगने का खतरा भी नहीं रहता है.
जब अलग-अलग लोग हाथ से दूध निकालते हैं, तो उनके निकालने का तरीका अलग होता है, जिससे पशु कभी कम तो कभी ज्यादा दूध देता है. मशीन का पल्सेशन हमेशा एक जैसा रहता है, जिससे पशु हर रोज पूरा दूध देता है.
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