तालाब बनाने में सरकार करेगी मददवैसे तो मछलियों के लिए बनने वाले तालाब में कई बातों का ख्याल रखा जाता है. लेकिन कुछ चीजें मौसम के हिसाब से भी तय की जाती हैं. ऐसा ही बांध का मामला है. खासतौर पर बरसात के दिनों में बांध का बहुत ख्याल रखा जाना चाहिए. समय-समय पर ये देखते रहें कि कहीं बांध कमजोर तो नहीं पड़ रहा है. मछलियों के तालाब में बांध का बड़ा रोल होता है. जैसे बांध इतना मजबूत होना चाहिये कि वह पानी के दबाव को सह सके. तालाब से पानी के रिसाव को भी रोक सके.
इसलिए निर्माण के वक्त बांध का भी बहुत ख्याल रखना चाहिए. मत्स्य निदेशालय, रांची, झारखंड (Jharkhand) में फिश ट्रेनिंग सेंटर के चीफ इंस्ट्रक्टर प्रशांत कुमार दीपक की मानें तो तालाब के जलक्षेत्र को नापने के बाद चारों तरफ पांच से सात फीट जमीन वर्म (Berm) के रूप में छोड़कर बांध बनाया जाय, जिससे बांध की मिट्टी के कटाव को रोककर तालाब में जाने से रोका जा सके.
फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो बांध ऐसा होना चाहिए कि तालाब का पानी बाहर न जाए और बाहर का गंदा पानी तालाब में न आए. इसलिए तालाब की खड़ी खुदाई नहीं करनी चाहिए. तालाब का किनारा डालयों होना चाहिए. तालाब का ढालान (Slope) 1:1.5 या 1:2 (ऊंचाई: आधार) अनुपात में होना चाहिये. इसलिए नया तालाब बनाते वक्त कई बातों का खास ख्याल रखना चाहिए.
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