Bakra for Bakrid: बकरीद पर मोटा-ताजा दिखाने के लिए बकरों संग हो रहा ये खेल

Bakra for Bakrid: बकरीद पर मोटा-ताजा दिखाने के लिए बकरों संग हो रहा ये खेल

Bakra for Bakrid कुर्बानी के लिए खरीदे जाने वाले बकरों में सबसे पहले यह देखा जाता है कि बकरा वजनदार है या नहीं. वजनदार और मोटे-ताजे बकरों के ही अच्छे दाम मिलते हैं. और यही सब दिखाने के लिए बकरे बेचने वाले बकरों संग खेला कर देते हैं.

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Bakra for Bakrid: बकरीद पर मोटा-ताजा दिखाने के लिए बकरों संग हो रहा ये खेलबकरीद के दौरान कुर्बानी के लिए तोतापरी बकरों की डिमांड रहती है.

बकरीद के लिए बकरा खरीदते वक्त बहुत सारे नियमों का पालन करना होता है. लेकिन बकरे में जो सबसे पहली चीज देखी जाती है वो है उसका वजनदार और मोटा-ताजा होना. बस इसी का फायदा बकरे बेचने वाले उठाते हैं. बकरे को मोटा-ताजा दिखाने के लिए उसके साथ ही खेल कर देते हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है कि ऐसे बकरों के अच्छे दाम मिल जाते हैं. उसी बकरे की बाजार में ज्यादा डिमांड होगी जिसका वजन ज्यादा होगा. बकरीद के मौके पर जहां 55 से 60 किलो वजन की नस्ल वाले बकरे बिकते हैं तो 30 से 35 किलो वजन तक के बरबरी और ब्लैक बंगाल नस्ल के बकरे भी बिकते हैं. 

लेकिन कुछ बकरे बेचने वाले बकरे का वजन बढ़ाने के लिए फर्जीवाड़ा करते हैं. गलत तरीकों का इस्तेमाल कर कुछ वक्त के लिए बकरों को मोटा ताजा और वजनदार दिखा देते हैं. लेकिन घर आते-आते कुछ ही घंटों में ऐसे बकरों की हवा निकल जाती है और असलियत सामने आ जाती है. गोट एक्सपर्ट की मानें तो सिर्फ 15 मिनट की मामूली सी जांच के बाद इस फर्जीवाड़े को आराम से पकड़ा जा सकता है.

15 मिनट की जांच में हो जाता है खुलासा 

बकरीद के मौके पर बकरा बाजार में भी खूब फर्जीवाड़ा होता है. कुछ गलत तरीकों का इस्तेमाल कर बकरे को वजनदार और हेल्दी दिखाया जाता है. जैसे बकरे को मोटा दिखाने के लिए उसे जरूरत से ज्यादा पानी पिला देते हैं. अब आप कहेंगे कि बकरा कैसे ज्यादा पानी पी लेता है. तो खेल ये कि बकरा पालक बकरे को एक खास चूरन चटाते हैं. इस चूरन को चाटने के बाद बकरे का गला खुश्क हो जाता है. ऐसे में जब बकरा पानी मांगता है तो उसके सामने बार-बार पानी रखा जाता है. और बकरा भी गटागट पानी पीता जाता है.

ऐसे बकरों की पहचान ये है कि ज्यादा पानी पीने के बाद बकरा जुगाली नहीं कर पाता है. आप ध्यान से देखेंगे तो बकरा 10-15 मिनट तक जुगाली नहीं करता है. अगर बकरा जुगाली न करे तो समझ लें कि बकरे को जरूरत से ज्यादा पानी पिलाया गया है. इसके अलावा हाथ की चारों उंगलियों को जब बकरे के पेट पर धीरे-धीरे मारते हैं तो उसमे से ढब-ढब की आवाज आती है, जबकि खाली पेट या फिर कम पानी वाले पेट से सामान्य आवाज आती हैं.  

आटे-बेसन के पानी का खेल

गोट एक्सपर्ट मोहम्मद इकबाल का कहना है कि बकरों को मोटा दिखाने के लिए कुछ लोग उन्हें बाजार में लाने से पहले आटे या बेसन का पानी पिलाते हैं. आटे-बेसन से बकरों का पेट फूल जाता है. बकरे मोटे और हेल्दी दिखाई देने लगते हैं. लेकिन ये तरीका बकरों को बुरी तरह से बीमार भी कर देता है. जब आप बकरे को घर लाते हैं तो उसका पेट सामान्य अवस्था में आने के साथ ही उसे पेट संबंधी परेशानी भी होने लगती हैं. कई बार तो बकरा इतना बीमार हो जाता है कि उसकी कुर्बानी तक नहीं हो पाती है. पेट को हाथों की उंगलियों से बजाकर पानी की जांच की जा सकती है.  

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