Horse Breed in India: भारत में बहुत मशहूर हैं घोड़ों की ये 7 नस्ल, खेलों में भी बजता है डंका 

Horse Breed in India: भारत में बहुत मशहूर हैं घोड़ों की ये 7 नस्ल, खेलों में भी बजता है डंका 

Horse Breed in India भारत में पाई जाने वालीं घोड़ों की नस्ल खेलों के साथ-साथ पहाड़ी और बर्फीले इलाके में बोझा ढोने तक के काम आती हैं. एक नस्ल ऐसी है जिसे आज भी दुर्गम इलाकों में लम्बी दूरी की यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जाता है. 

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Horse Breed in India: भारत में बहुत मशहूर हैं घोड़ों की ये 7 नस्ल, खेलों में भी बजता है डंका घुड़सवारी खेल

देश में वैसे तो घोड़ों की कई नस्ल हैं, लेकिन खास 7 ऐसी नस्ल हैं जिन्हें भारत सरकार ने भी मान्यता दी हुई है. ये सभी रजिस्टर्ड नस्ल हैं. सभी 7 नस्ल देश में खासी मशहूर हैं. दो नस्ल तो ऐसी हैं जिनका विदेशों तक में नाम है. ये ऊंची कद-काठी वाली नस्ल के घोड़े हैं. दिखने में ये युद्ध में काम आने वाले घोड़े लगते हैं. सभी 7 नस्ल का अपना अलग-अलग काम है. एक नस्ल ऐसी भी है जिसे उसकी ऊंची कद-काठी और फुर्ती के चलते शौक के लिए पाला जाता है. 

भारत में मारवाड़ी, काठियावाड़ी, स्पीती, जंसकारी और मणि‍पुरी आदि सात नस्ल के घोड़े हैं. अभी तक इन घोड़ों की खूबसूरती और काबलियत सिर्फ भारत तक ही सीमित थी, लेकिन अब इनके एक्सपोर्ट का रास्ता भी खुल गया है. दूसरे देशों में रहने वाले घोड़ों के शौकीन भी अब इन्हें खरीदकर अपना शौक पूरा कर सकेंगे.  

घोड़ों की नस्ल और उनकी खासियत 

  • मारवाड़ी घोड़ों को मुख्य रूप से सवारी और खेल के लिए पाला जाता है. देश में यह सबसे ऊंचे और लम्बे घोड़े की भारतीय नस्ल है. 
  • कठियावाड़ी नस्ल गुजरात के सौराष्ट्र की है. इसके अलावा यह राजकोट, अमरेली और जूनागढ़ जिलों में भी मिलते हैं. इसका रंग ग्रे और गर्दन लंबी होती है. मारवाड़ी नस्ल जैसा ही कीमती होता है.
  • स्पीती घोड़े कम चारे पर, कम तापमान वाले पहाड़ी इलाकों और ऊंची, लंबी दूरी की यात्रा के लिए इन्हें बहुत अच्छा माना जाता है. ये घोड़े कद में छोटे होते हैं.
  • जंसकारी घोड़े पहाड़ों पर सवारी और सामान ढोने के काम आते हैं. लेह-लद्दाख में बहुत हैं. संख्या कम होने के चलते इनकी नस्ल बचाने पर काम चल रहा है. कारगिल की लड़ाई में इनका बड़ा योगदान रहा था.
  • मणिपुरी नस्ल के घोड़ों को पोलो खेल में इस्तेमाल होने के चलते इन्हें पोलोपोनी भी कहा जाता है. इस नस्ल के घोड़े काफी ताकतवर और फुर्तीले होते है. यह एक ऐसी नस्ल है जो 14 अलग-अलग रंगों में पाई जाती है. 
  • भूटिया नस्ल के घोड़े सिक्किम और दार्जिलिंग इलाके में पाए जाते हैं. इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से घुड़दौड़ और सामान ढोने के लिए किया जाता है. इस नस्ल के घोड़े ज्यादातर नार्थ-ईस्ट में मिलते हैं.

 
कच्छी-सिंधी घोड़े की नस्ल रेगिस्तानी इलाके की है. इस नस्ल के घोड़े गुजरात के कच्छ और राजस्थान के जैसलमेर-बाड़मेर में खुद को बड़ी आसानी से ढाल लेते हैं. दूसरे घोड़ों के मुकाबले यह ज्यादा से ज्यादा गर्मी को भी सहन कर लेते हैं.

निष्कर्ष- 

इस जोन के बन जाने से अब घोड़ों से जुड़े कई क्षेत्रों में इसका फायदा मिलेगा. जैसे खेलों में खरीद-फरोख्त में, प्रजनन (ब्रीडिंग) में और बायो सिक्योरिटी के साथ-साथ डीजीज फ्री कम्पार्टमेंट को मजबूत करने में इसका बड़ा फायदा मिलेगा. हालांकि अफ्रीकी हॉर्स सिकनेस के मामले में भारत साल 2014 में भी बड़ी कामयाबी हासिल कर चुका है.

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