सीआईआरजी में बकरी के बच्चों की मृत्यु दर को कंट्रोल करने के लिए लगातार काम चल रहा है. फोटो क्रेडिट-किसान तक पहले से प्लान किए गए गर्भधारण के आधार पर मार्च-अप्रैल में बकरियां बच्चे देती हैं. मई-जून में भीषण गर्मी पड़ रही होती है. सूरज सिर पर चमक रहा होता है और तापमान 48-49 तक पहुंच जाता है. ऐसे में पैदा होने वाले बकरी के बच्चों की उम्र बामुश्किल दो से तीन महीने की ही होती है. और आपको जानकर हैरत होगी कि गर्मियों में भी बकरी के बच्चों को निमोनिया होता है. जबकि आमतौर पर ये माना जाता है कि निमोनिया जैसी बीमारी ठंड के मौसम में होती है. इंसान हो या पशु सभी में निमोनिया की वजह सर्दी को माना जाता है. इस बारे में केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा के साइंटिस्ट का कहना है कि गर्मी जैसे मौसम में भी बकरी के बच्चों को निमोनिया हो जाता है.
कई बार इसी निमोनिया के चलते बकरी के बच्चों की मौत तक हो जाती है. इसलिए गर्मी शुरू होते ही बकरियों के शेड में परिवर्तन कर देना चाहिए. साइंटिस्ट डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि जब बकरियों के बच्चों में निमोनिया होता है तो उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है. बुखार आने लगता है. इतना ही नहीं उनकी नाक भी बहने लगती है. किसान इन लक्षणों को अच्छी तरह से पहचानते हैं. इसलिए लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें.
साइंटिस्ट डॉ. अशोक कुमार ने किसान तक को बताया कि हमारे देश में जब भी मौसम परिवर्तन होता है तो अचानक से होता है. जैसे अगर गर्मियां शुरू होती हैं तो तापमान अचानक तेजी के साथ बढ़ने लगता है. ऐसे मौसम में खासतौर पर बकरी के बच्चे अपने को उस मौसम में नहीं ढाल पाते हैं. जिसके चलते वो निमोनिया की चपेट में आ जाते हैं. निमोनिया शुरू होते ही उन्हें बुखार आने लगता है, नाक बहती है और सांस लेने में परेशानी होती है. जैसे ही यह लक्षण दिखाई दें तो फौरन ही डॉक्टर के पास ले जाएं. जब तक डॉक्टर दवाई खिलाने की कहे तो बकरी के बच्चे को लगातार बिना गैप के उसे दवाई खिलाएं.
डॉ. अशोक कुमार ने गर्मी के इस मौसम में बचाव के लिए टिप्स देते हुए कहा कि गर्मी शुरू होते ही सबसे पहले तो बकरी पालक को बकरियों के आवास में बदलाव करना चाहिए. बकरियों के शेड को इस तरह से ढक दें कि उसमे गर्म हवाएं आसानी से न आएं. दूसरा यह कि दोपहर एक बजे से चार बजे तक बकरियों और उनके बच्चों को चराने न ले जाएं. सुबह और शाम में ही बकरियों को चराने ले जाएं.
पानी खूब पिलाएं. ध्यान रहे कि मौसम के चलते पानी गर्म न हो. क्योंकि गर्मी के मौसम में बकरियों के चरने के वक्त में कमी आ जाती है तो उन्हें शेड में ही भरपूर चारा दें. कोशिश करें कि इस दौरान बकरियों और उनके बच्चों को पूरा न्यूट्रिशन दें. इसके लिए चाहें तो पैलेट्स फीड भी खिला सकते हैं.
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