बिहार में ‘फ्रेश कैच’ से बदलेगी मछली बिक्री की तस्वीर, सात निश्चय‑3 के तहत शुरू हुआ बड़ा अभियान

बिहार में ‘फ्रेश कैच’ से बदलेगी मछली बिक्री की तस्वीर, सात निश्चय‑3 के तहत शुरू हुआ बड़ा अभियान

सात निश्चय‑3 प्रोग्राम के तहत बिहार सरकार शहरी इलाकों में ‘फ्रेश कैच’ कियोस्क शुरू कर रही है, जो पारंपरिक रेहड़ी-पटरी की जगह आधुनिक और हाइजीनिक मछली आउटलेट्स उपलब्ध कराएंगे. बक्सर सहित कई शहरों में जमीन चिन्हित की जा रही है. इससे न केवल ग्राहकों को बेहतर और ताजी मछली मिल सकेगी, बल्कि मछली पालकों को सीधी बिक्री का मौका मिलेगा, बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और आय बढ़ेगी. राज्य सरकार इसे शहरी बाजार सुधार और ग्रामीण आजीविका बढ़ाने की बड़ी पहल मान रही है.

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बिहार में ‘फ्रेश कैच’ से बदलेगी मछली बिक्री की तस्वीर, सात निश्चय‑3 के तहत शुरू हुआ बड़ा अभियानबिहार में मछली पालन को बढ़ावा

बिहार सरकार अपने सात निश्चय-3 प्रोग्राम के तहत ब्रांडेड ‘फ्रेश कैच’ कियोस्क शुरू करके शहरी इलाकों में मछली की खुदरा बिक्री को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर रही है. ये कियोस्क, राज्य के जाने-माने सुधा डेयरी मिल्क पार्लरों से प्रेरित हैं. इनका मकसद सड़क किनारे जहां-तहां रेहड़ी-पटरी पर मछली बिक्री (इनफॉर्मल वेंडिंग) की जगह ऑर्गनाइज़्ड, हाइजीनिक आउटलेट्स लगाना है, जो ग्राहकों को फ्रेश मछली और सीफूड देंगे.

यह पहल बक्सर में तेजी से आगे बढ़ रही है, जहां अधिकारियों ने कियोस्क लगाने के लिए जमीन पहचानने का प्रोसेस तेज कर दिया है. अधिकारियों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ शहरों में अच्छी क्वालिटी की मछली आसानी से मिल पाएगी, बल्कि सड़क किनारे मीट और सीफूड की बिना किसी रोक-टोक के बिक्री से होने वाली सफाई की दिक्कतों का भी हल निकलेगा.

गांवों में रोजी-रोटी बढ़ाने की मुहिम

फ्रेश कैच स्कीम खेती से जुड़े सेक्टर्स को मजबूत करने और गांवों में रोजी-रोटी बढ़ाने की राज्य की बड़ी कोशिशों का हिस्सा है. मछली पालने वालों को डायरेक्ट बिक्री का अवसर देकर, सरकार का मकसद बिचौलियों पर निर्भरता कम करना, बेहतर कीमत दिलाना और ग्राहकों के लिए क्वालिटी स्टैंडर्ड बनाए रखते हुए किसानों की कमाई बढ़ाना है.

अधिकारियों ने कियोस्क लगाने के लिए ज्यादा आने-जाने वाली जगहों को प्राथमिकता दी है, जिसमें नगर निगम के बाजार, पब्लिक हाट, रेलवे कॉलोनी, बस टर्मिनल और घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके शामिल हैं. जिला मछली पालन अधिकारियों ने बक्सर और डुमरांव में पंचायत स्तर पर जमीन की पहचान में तेजी लाने को भी कहा है. यह देखते हुए कि हर कियोस्क के लिए लगभग 15×15 वर्ग फीट जगह की जरूरत होगी. नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लेने और कानूनी मंजूरी पूरी करने के लिए रेवेन्यू और ब्लॉक प्रशासन के साथ तालमेल किया जा रहा है.

खुदरा मछली बिक्री में आएगी तेजी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस कदम से मछली की खुदरा बिक्री में तेजी आएगी और ग्राहकों में इसके प्रति भरोसा भी जगेगा. साफ-सफाई के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ेगी. साथ ही सार्वजनिक बाजारों में बर्बादी कम करने और सफाई बेहतर करने में मदद मिलेगी. इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता वाली पहल के तौर पर रखा गया है, और जिला अधिकारियों को कड़ी निगरानी का काम सौंपा गया है. इसे लागू करने की रफ्तार काफी हद तक जमीन के बंटवारे और इंफ़्रास्ट्रक्चर की तैयारी पर निर्भर करेगी, जिसे अधिकारी सात निश्चय-3 के विजन को असलियत में बदलने के लिए बहुत जरूरी मानते हैं.

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