प्रतीकात्मक तस्वीर.ये कहना कतई गलत नहीं होगा कि हरा चारा पशुपालन का आधार है. अगर आपको हरा चारा आसानी से और अच्छे दाम पर मिल जा रहा है तो फिर आपका मुनाफा बढ़ेगा ही घटेगा नहीं. अगर मौजूदा वक्त की बात करें तो देश में हरे और सूखे चारे की कमी है. और चारे की ये कमी कम होने की बजाए बढ़ रही है. बीते कई साल से हरे चारे की कमी और घटते उत्पादन को लेकर देशभर में खूब चर्चा हो रही है. हालांकि इस कमी को दूर करने के लिए कुछ काम धीरे-धीरे शुरू हुए हैं, लेकिन अभी वो नाकाफी साबित हो रहे हैं. हरे चारे से बनने वाले साइलेज को लेकर अभी जागरुकता की कमी देखी जा रही है.
वहीं ऐसे में पशुपालकों के लिए हरे चारे से जुड़ी एक अच्छी खबर है. फोडर साइंटिस्ट ने एक ऐसा हरा चारा तैयार हो रहा है जो उनकी परेशानी को काफी हद तक दूर करने में कामयाब होगा. हालांकि अभी इसका फायदा देश के सिर्फ चार राज्यों को ही मिलेगा. इन्हीं चार राज्यों में इस हरे चारे की खास किस्म तैयार की गई हैं. इस हरे चारे को तैयार करने वाले साइंटिस्ट का दावा है कि ये एक ऐसा हरा चारा है जिसे खाकर मीट के लिए पशु की बॉडी ग्रोथ भी होगी और पशु का दूध उत्पादन भी बढ़ेगा.
फोडर एक्सपर्ट का कहना है कि जई की नई उन्नत किस्म एचएफओ 906 किस्म में प्रोटीन की मात्रा और पाचनशीलता अधिक होने के कारण ये पशुओं के लिए बहुत अच्छा हरा चारा है. देश में 11.24 फीसद हरे और 23.4 फीसद सूखे चारे की कमी को देखते हुए ही जई की इस नई किस्म को तैयार किया गया है. क्योंकि चारे की कमी के चलते पशुओं की उत्पादकता कम हो रही है.
जई चारे की अधिक गुणवत्तापूर्ण और ज्यादा पैदावार देने वाली किस्में विकसित होने से पशुपालकों को इसका बड़ा फायदा होगा और पशुओं की उत्पादकता भी बढ़ेगी. साथ ही एचएफओ 906 किस्म राष्ट्रीय स्तर की चैक किस्म कैंट और ओएस (6) 14 फीसद तक ज्यादा हरे चारे की पैदावार देती है. जई की एचएफओ 906 एक कटाई वाली किस्म है.
एक्सपर्ट का कहना है कि जई की एचएफओ 906 किस्म को देश के उत्तर-पश्चिमी जोन (हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उतराखंड) के लिए समय पर बिजाई हेतु खासतौर पर अनुमोदित की गई है. उनका कहना है कि एचएयू द्वारा विकसित की गई फसलों की किस्मों का न केवल हरियाणा बल्कि देश के अन्य राज्यों के किसानों को भी खूब फायदा मिल रहा है. चारे की विकसित किस्मों की मांग दूसरे प्रदेशों में भी लगातार बढ़ती जा रही है. यह हमारे एचएयू और हरियाणा के लिए गर्व की बात है. उन्होंने इस उपलब्धि के लिए चारा अनुभाग के वैज्ञानिकों को बधाई दी और भविष्य में भी अपने प्रयास जारी रखने का आह्वान किया.
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