देश में पशु चिकित्सकों की कमी है.खेती के मुकाबले लाइव स्टॉक यानि डेयरी-पोल्ट्री तेजी से बढ़ रहा है. खेती से तुलना करें तो डेयरी-पोल्ट्री की दोगुनी रफ्तार से ग्रोथ हो रही है. एक्सपर्ट के मुताबकि आने वाले 6-7 साल में ये लाइव स्टॉक सेक्टर तेजी से तरक्की करेगा. उत्पादन बढ़ने के साथ ही नौकरी और कारोबार के रास्ते खुलेंगे. लेकिन इसके लिए इस सेक्टर को सुराक्षित करने की भी जरूरत है. इसी को देखते हुए बजट 2026 में एक बड़ा ऐलान किया गया है. पशुपालन, पोल्ट्री और फिशरीज में बढ़ती बीमारी और संक्रमण को देखते हुए सरकार ने पशु चिकित्सक (Veterinarian) की संख्या बढ़ाने की बात कही है. साथ ही अगर प्राइवेट सेक्टर में पशु चिकित्सा को बढ़ावा दिया जाता है सरकार ऐसे लोगों के लिए सब्सिडी सहायता योजना शुरू करने जा रही है.
वहीं पशुपालकों को पशुओं से जुड़ी छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी पशु को लेकर अस्पतालों के चक्कर ना लगाने पड़ें इसके लिए सरकार 1.5 पशु देखभाल सेवा प्रदाताओं को ट्रेनिंग दी जाएगी. गौरतलब रहे देश में जहां पशुओं की संख्या ज्यादा है वहीं पशु चिकित्सकों की संख्या कम है. बीमार होने पर पशुओं को ठीक तरह से चिकित्सकों की सेवा नहीं मिल पा रही है. देश में 10 हजार से ज्यादा पशु चिकित्सकों की कमी है.
पशु चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बजट में ऐलान किया है. जैसे अगर कोई वेटरनरी, पैरा वेट कॉलेज, वेटरनरी हॉस्पिटल, डायग्नोस्टिक, लेबोरेटरी और ब्रीडिंग की सुविधा पर काम करता है तो सरकार इसके लिए सब्सिडी देने का काम करेगी.
केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में पशु चिकित्सकों के 40603 पद स्वीकृत हैं. वहीं इसके मुकाबले खाली पदों की बात करें तो उनकी संख्या 10474 है. ये आंकड़ा करीब 25 फीसद है. इसमे भी अकेले सात बड़े राज्य करीब सात हजार चिकित्सकों की कमी का सामना कर रहे हैं. सबसे ज्यादा कमी राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में है. महाराष्ट्र 2165, राजस्थान 1367 और कर्नाटक में 1136 पद पशु चिकित्सकों के खाली हैं. इसके अलावा पंजाब, उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार में भी पशु चिकित्सकों की संख्या बहुत कम हैं. उत्तर प्रदेश 560, पंजाब 560, गुजरात 923 और बिहार में 860 पशु चिकित्सकों के पद खाली हैं. और मंत्रालय का ही आंकड़ा बताता है कि इन राज्यों में ही पशुओं की संख्या ज्यादा है.
एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो कोविड, स्वाइन फ्लू, एशियन फ्लू, इबोला, जीका वायरस, एवियन इंफ्लूंजा समेत और भी न जानें ऐसी कितनी महामारी हैं जो पशु-पक्षियों से इंसानों में आई हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक 17 लाख वायरस जंगल में फैले होते हैं. इसमे से बहुत सारे ऐसे हैं जो जूनोटिक हैं. जूनोटिक वो होते हैं जो पशु-पक्षियों से इंसान में फैलते हैं. जूनोटिक के ही दुनिया में हर साल 100 करोड़ केस सामने आते हैं और इससे 10 लाख की मौत हो जाती हैं. अब वर्ल्ड लेवल पर इस पर काबू पाने की कवायद शुरू हो गई है.
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