प्रदेशभर में भूसा बैंक की स्थापना तेजी से की जा रही हैजून की गर्मी तो सब झेल ही रहे हैं, लेकिन अल नीनो के असर ने गर्मी से और ज्यादा डरा दिया है. खासतौर पर ऐसे पशुओं की ओर से जो अपनी परेशानी को खुद बता भी नहीं सकते हैं. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो तेज गर्मी के बीच खासतौर पर गाय-भैंस में बबेसियोसिस बीमारी का खतरा बना रहता है. दूधारू पशुओं के लिए ये बीमारी खतरनाक मानी जाती है. गर्मी और बरसात के मौसम में गाय-भैंस पर ज्यादा अटैक करती है. इसकी एक खास वजह ये भी है कि बबेसियोसिस के कारक पैरासाइट ज्यादा गर्मी और ज्यादा नमी में तेजी से पनपते हैं. इस पैरासाइट के चलते पशुओं में खून की कमी होने लगती है. वहीं दूध उत्पादन घट जाता है.
ऐसे में अगर वक्त रहते इस बीमारी के लक्षणों को नहीं पहचाना गया, वक्त से पशु का इलाज शुरू नहीं हुआ तो कई बार पशु की मौत तक हो जाती है. गाय-भैंस में होने वाली किलनियों और चीचड़ भी बड़ी परेशानी है. और एक हकीकत ये भी है कि बबेसियोसिस बीमारी की वजह भी यही दोनों होते हैं. बबेसियोसिस की प्रजातियों में बबेसिया बोविस, बबेसिया मेजर, बबेसिया बाइजेमिया और बबेसिया डाईवरजेन्स शामिल हैं. इस बीमारी से दूध उत्पादन का घटना, ग्रोथ में कमी का होना आम है.
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