Milk Production: ट्रिपल S टेक्नोलॉजी ने बदल दिया पशुपालन और डेयरी सेक्टर का बाजार, पढ़ें डिटेल Milk Production: ट्रिपल S टेक्नोलॉजी ने बदल दिया पशुपालन और डेयरी सेक्टर का बाजार, पढ़ें डिटेल
Milk Production केन्द्र सरकार डेयरी और पशुपालन में नई-नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है. पशुपालन में वैक्सीन, चारे और गर्भाधान से जुड़ी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की जा रही हैं. डेयरी में मार्केटिंग और प्रोसेसिंग से जुड़ी टेक्नोलॉजी पर काम हो रहा है. सरकार कई बड़ी योजनाओं पर करोड़ों रुपये का बजट भी दे रही है.
भैंस की टॉप 4 नस्लेंनासिर हुसैन - New Delhi,
- Feb 18, 2026,
- Updated Feb 18, 2026, 10:53 AM IST
एक वक्त था जब देश में नाम मात्र के लिए ही दूध का उत्पादन होता था. लेकिन अब पिछले 27 साल से वही देश दूध उत्पादन में नंबर वन पर है. लेकिन कामयाबी का ये सफर अभी यहीं पर नहीं रुका है. हर रोज पशुपालन और डेयरी सेक्टर में नई-नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है. कोशिश एक ही है कि कैसे प्रति पशु दूध उत्पादन को बढ़ाया जाए. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो इसमे कामयाबी मिल भी रही है. ट्रिपल S टेक्नोलॉजी पशुपालन और डेयरी सेक्टर दोनों की ही तस्वीर बदल रही है. सैक्स सॉर्टेट सीमन को ही ट्रिपल S कहा जा रहा है.
इसकी मदद से अच्छी गुणवत्ता की और ज्यादा दूध देने वाली बछिया पैदा कराई जा रही हैं. इस टैक्नोलॉजी की मदद से पशुपालकों और डेयरी फार्मर की इनकम को बढ़ाया जा रहा है. पशुओं की दूध उत्पादकता बढ़ाने के लिए अभी इस टैक्नोलॉजी पर और काम चल रहा है. जिसका फायदा ये होगा कि उत्पादन बढ़ने के साथ ही डेयरी प्रोडक्ट की खपत भी बढ़ेगी, जिससे उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलेगी.
ट्रिपल S टेक्नोलॉजी सेक्स सॉर्टेट सीमन
- सेक्स सॉर्टेट सीमन के इस्तेमाल को बढ़ाया जा रहा है.
- पांच सरकारी वीर्य केंद्रों पर ट्रिपल S की सर्विस दी जा रही है.
- अब तक देश में 130 लाख ट्रिपल S स्ट्रॉ का उत्पादन हो चुका है.
- निजी वीर्य केंद्रों से उत्पादित वीर्य डोज भी इस टारगेट में शामिल हैं.
- सेक्स सॉर्टेट सीमन पर पशुपालकों को 50 फीसद की छूट दी जाती है.
- सेक्स सॉर्टेट सीमन को स्वदेशी और किफायती बनाया गया है.
- अक्टूबर 2024 में पीएम नरेन्द्र मोदी ने इसे लॉन्च किया था.
- देशभर में हर छोटे-बड़े आठ करोड़ पशुपालकों को इससे फायदा मिलेगा.
- ट्रिपल S से 85 से 90 फीसद केस में बछिया ही पैदा होती है.
IVF से सुधार रही हैं पशुओं की नस्ल
- देशभर में 23 गोजातीय आईवीएफ लैब चालू की गई हैं.
- अब तक 26987 भ्रूणों का प्रजनन किया जा चुका है.
- 14993 भ्रूण गायों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं.
- IVF तकनीक की मदद से 2361 बछड़ों का जन्म हो चुका है.
- आईवीएफ तकनीक किसानों के घर तक पहुंचाई जा रही है.
- एक सफल IVF केस पर पशुपालकों को पांच हजार रुपये दिए जाते हैं.
- पहली बार राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत गोजातीय IVF तकनीक शुरू की गई है.
- एनडीडीबी और पशुपालन विभाग ने सितंबर 2024 को आईवीएफ लॉन्च किया था.
- पशुधन, डेयरी और पशुपालन क्षेत्रों में मौजूदा और उभरते स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जा रहा है.
- स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए फरवरी 2023 हैदराबाद में कॉन्क्लेव आयोजित किया गया था.
PDFA: ये हैं 80 और 30 लीटर दूध देकर ट्रैक्टर जीतने वालीं गाय-भैंस, गांव में हो रहा स्वागत
Economic Survey: कृषि क्षेत्र की धीमी चाल, डेयरी-पोल्ट्री और मछली पालन ने कैसे ली ऊंची उड़ान?