ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को मिलेगा बड़े पैमाने पर रोजगारअगर जून महीने में आपको मौसम में अचानक से बदलाव दिखाई देने लगे तो परेशान न हों. मौसम को लेकर ऐसी चेतावनी आ रही है कि भारत के मौसम पर अल नीनो का असर दिखाई दे सकता है. अल नीनो के असर से होता ये है कि गर्मी तेज पड़ने लगती है, वहीं बारिश कम हो जाती है. इस तरह का मौसम पशुपालकों को बहुत परेशान करता है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो इस तरह का मौसम पशुओं की भूख और उनके हाजमें पर असर डालता है. पशुओं का पेट खराब हो सकता है. मौसमी तनाव के चलते पशुओं की भूख तक कम हो जाती है. इसका असर पशुओं के दूध उत्पादन पर पड़ता है. उत्पादन कम होने के साथ ही दूध में फैट अच्छी नहीं आती है.
यहां तक की दूध में एसएनएफ की मात्रा बनना भी कम हो जाती है. ऐसे में एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि पशुओं को मीठा सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट) खिलाया जा सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि वैसे भी ज्यादातर पशुपालकों के लिए फौरी तौर पर गाय-भैंस की पेट संबंधी बीमारी के लिए सिर्फ एक दवाई मीठा सोडा होती है. लेकिन इसे खिलाने से पहले अलर्ट हो जाएं. क्योंकि मीठा सोडा जितना फायदेमंद हैं उतना ही नुकसानदायक भी साबित हो सकता है. जरूरत से ज्यादा और बिना डॉक्टरी सलाह के मीठा सोडा नहीं खिलाना चाहिए.
दुधारू पशुओं के लिए मीठा सोडा बहुत ही उपयोगी माना जाता है. पशुपालन में इसका इस्तेमाल खासतौर पर पशु के पाचन को सुधारने और दूध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किया जाता है.
लगातार मीठा सोडा न खिलाएं, जब पशु को ज्यादा दाना खिलाया जा रहा हो या पाचन की परेशानी हो.
पशुओं को साधारण नमक खिला रहे हैं तो सोडे की मात्रा का ध्यान रखें, जिससे शरीर में सोडियम का संतुलन न बिगड़े.
पशु गाभिन है या कोई दूसरी गंभीर बीमारी है तो डॉक्टरी सलाह पर ही मीठा सोडा खिलाएं.
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