गायों की रहस्यमयी मौतपशुपालन और डेयरी से किसानों को जोड़ने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही हैं. केन्द्र सरकार की ओर से तरह-तरह की योजनाएं भी चलाई जा रही हैं. राज्य सरकारें भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को डेयरी और पशुपालन से जोड़ने के लिए सालभर कुछ न कुछ करती ही रहती हैं. ऐसी ही एक कोशिश राजस्थान सरकार ने शुरू की है. सरकार की ओर से राजस्थान में पशु मेलों की संख्या बढ़ाई जा रही है. राजस्थान के पशुपालन विभाग से जुड़े जानकारों की मानें तो अभी राज्य के सिर्फ सात जिलों में ही 10 पशु मेलों का आयोजन किया जाता है. लेकिन ये उम्मीद के मुताबिक कामयाब नहीं हो पा रहे हैं.
क्योंकि मेलों की कम संख्या और मेला स्थल की दूरी के चलते दूर-दराज में रहने वाले पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. वो जल्दी मेला स्थल तक नहीं पहुंच पाते हैं. कई बार तो दूरी के चलते पशुपालक पशु मेलों में हिस्सा भी नहीं ले पाते हैं. पशुपालकों की इसी परेशानी को देखते हुए राज्य सरकार ने उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर, झुंझुनू, चुरू, जैसलमेर, राजसमन्द, पाली, सिरोही, जयपुर और जालौर समेत 11 जिलों में पशु मेले आयोजन का ऐलान किया गया है. साथ ही इसके लिए प्रशासनिक और वित्तीय अनुमति भी जारी कर दी गई है.
डेयरी और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ये भी बड़ा ऐलान किया है कि राज्य में एक हजार नए मिल्क कलेक्शन पॉर्लर खुलेंगे. 100 गौशालाओं को गौकाष्ठ मशीन वितरित की जाएंगी. प्रदेश के तीन लाख 25 हजार पशुपालकों को पांच रुपये प्रति लीटर के आधार पर 200 करोड़ रुपये की सहायता राशि भी डीबीटी के माध्यम से उनके खातों में भेजी गई है. पशुपालन, डेयरी, मछली पालन से जुड़ी गतिविधियों के लिए अब तक 3.82 लाख पशुपालकों को पशुपालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किये जा चुके हैं.
राजस्थान में पशुपालन और डेयरी की बड़ी संभावनाएं हैं. गाय ही नहीं भेड़-बकरियों की संख्या भी दूसरे प्रदेशों के मुकाबले ज्यादा है. इसी के चलते सरकार ने राज्य में पशुपालन और दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. हाल ही में सीएम भजनलाल ने कई योजनाओं की शुरुआत की है. जिसमे 200 नए बल्क मिल्क कूलर्स, 1000 नए डेयरी बूथ को आवंटन पत्र, गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत 20 हजार गोपालकों को एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करना शामिल है.
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