
यूएस डेलीगेशन को भारत आए आज तीसरा दिन है. India-US ट्रेड डील को लेकर सरकार संग बातचीत चल रही है. वहीं देश में इस डील का विरोध भी हो रहा है. आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस डील से भारतीय किसान सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं. इसी बीच पोल्ट्री प्रोडक्ट को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं. ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं कि चिकन इंपोर्ट पर टैरिफ कम कर उसे भारत में बेचने की मंजूरी दी जा सकती है. बड़ी मात्रा में चिकन भारत में भेजा जाएगा. जिसके चलते भारत में ब्रायलर पोल्ट्री फार्म पर इसका बड़ा असर पड़ेगा.
एक्सपर्ट की मानें तो भारत के मुकाबले अमेरिका से आने वाला चिकन सस्ता होगा. हालांकि अभी भारत सरकार ने चिकन इंपोर्ट पर 45 फीसद टैरिफ लगाया हुआ है. वहीं पोल्ट्री से जुड़े जानकारों की मानें तो सरकार ने ये कदम देश के पोल्ट्री सेक्टर को बचाने और उसे संरक्षण देने के लिए उठाया है. वहीं अमेरिका चाहता है कि भारत चिकन के आयात पर लगे टैरिफ को कम करे.
पोल्ट्री सेक्टर से जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिका संग पोल्ट्री को लेकर डील होती है तो उसके दो पहलू हैं. पहला तो ये कि इसका भारत के अंडा बाजार पर कोई असर नहीं पड़ेगा. क्योंकि अमेरिकी अंडा भारत आकर महंगा हो जाएगा, जबकि भारत में अंडा 6 से 7 रुपये तक का मिल जाता है. अब अगर चिकन की बात करें तो हमारे यहां हर साल 50 लाख टन से ज्यादा चिकन का उत्पादन होता है. ऐसे में अगर अमेरिका से सिर्फ लेग पीस ही आते हैं तो इसका बड़ा असर देश के पोल्ट्री सेक्टर पर पड़ेगा.
पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि देश में हर महीने 45 से 50 करोड़ मुर्गे खाए जाते हैं. चूजे (चिक्स) बेचने वाली कंपनियां हर महीने ब्रॉयलर पोल्ट्री फार्मर को 45 से 50 करोड़ चूजे बेचती हैं. 30 से 35 दिन बाद यही चूजे बाजार में बेचने लायक हो जाते हैं. देश में करीब पांच लाख पोल्ट्री फार्मर ऐसे हैं जो चिकन के लिए चूजे पालते हैं. एक फार्म पर एवरेज पांच कर्मचारी काम करते हैं.
इसके लिए फार्म में फीड सप्लाई करने वाली कंपनियां, दवाई और फार्म में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बनाने वाली कंपनियां, फीड के लिए मक्का, बाजरा और दूसरे आइटम बेचने वाले. चिकन की ट्रेडिंग और बिक्री करने वालों को मिला लें तो करीब दो से ढाई करोड़ लोग सीधे तौर पर ब्रॉयलर पोल्ट्री फार्म से जुड़े होते हैं.
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