बकरी पालन से बदली गांव की किस्मतकेन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मथुरा के साइंटिस्ट का दावा है कि अगर साइंटीफिक तरीके से बकरियों को गाभिन कराया है तो आने वाला बच्चा कई तरह की छोटी और बड़ी बीमारियों से बचा रहेगा. गोट एक्सपर्ट की मानें तो बकरी के बच्चों की सबसे ज्यादा मौत पैदा होते ही विपरीत मौसम के चलते होती है. भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड बच्चों के लिए जानलेवा हो जाती है. यही वजह है कि गोट साइंटिस्ट गर्मियों में अप्रैल से लेकर जून तक बकरी को गाभिन कराने की सलाह देते हैं. इसलिए जैसे ही बकरी हीट में आ जाए तो 24 से 30 घंटे के अंदर उसे गाभिन करा दें.
बकरी के बच्चों की मृत्यु दर कम हो जाए. बच्चा हेल्दी हो ओर बीमारियों की चपेट में न आए. साथ ही बकरी भी बच्चा देने के बाद हेल्दी रहे और खूब उत्पादन करे. इसके लिए जरूरी है कि साइंटीफिक तरीके से बकरी को गाभिन कराया जाए. कृत्रिम गर्भाधान कराने से पहले इस्तेमाल होने वाले वीर्य की भी पूरी डिटेल ले ली जाए जिससे ब्रीडर की बीमारियों के बारे में भी पता चल सके.
गोट एक्सपर्ट साइंटिस्ट का का कहना है कि ब्रीडर बकरा आपके अपने गोट फार्म हाउस का हो या किसी और का, लेकिन इस बात की तस्दीक कर लेना बहुत जरूरी है कि ब्रीडर उस प्योर नस्ल का है या नहीं जिस नस्ल की बकरी है. वहीं इस बात की जांच भी कर लें कि ब्रीड के मुताबिक ब्रीडर बकरे में उसकी नस्ल के सारे गुण हैं कि नहीं. जैसे उसका रंग, उसकी हाइट, उसका वजन, उसके कान और शरीर की बनावट.
गोट एक्सपर्ट बताते हैं कि ब्रीडर बकरे की फैमिली क्वालिटी से मतलब यह है कि जो ब्रीडर की मां है वो दूध कितना देती थी. उस बकरी से एक बार में कितने बच्चे होते थे. इतना ही नहीं जब ब्रीडर पैदा हुआ था तो उस वक्त कितने बच्चे दिए थे. ब्रीडर के पिता की हाइट कितनी थी. पिता की ग्रोथ रेट कैसी थी. ब्रीडर के दूसरे भाई-बहन कैसे हैं.
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