Animal Care in June: जून में पशुओं के लिए भूसा-हरा चारा और पानी का ऐसे करें मैनेजमेंट, ये हैं टिप्स 

Animal Care in June: जून में पशुओं के लिए भूसा-हरा चारा और पानी का ऐसे करें मैनेजमेंट, ये हैं टिप्स 

Animal Care in June हीट स्ट्रेस के चलते पशुओं को कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं. इसके चलते उत्पादन की लागत भी बढ़ जाती है. पशुओं के पीने के पानी का बहुत ख्याल रखना चाहिए. हरा चारा भी पानी की कमी को पूरा करता है. इस दौरान पशुओं को पानी पिलाने और सुबह-शाम नहलाने में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, वर्ना पशु हीट स्ट्रेस और हीट स्ट्रोक की चपेट में आ सकता है. 

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Animal Care in June: जून में पशुओं के लिए भूसा-हरा चारा और पानी का ऐसे करें मैनेजमेंट, ये हैं टिप्स कोई भी गोवंश सड़क पर बेसहारा न घूमे और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके

जून वो महीना होता है जब गर्मी अपने चरम पर होती है. ऊपर से जब जून में अल नीनो की चर्चा हो रही हो तो फिर परेशानी और ज्यादा बड़ी हो जाती है. इस मौसम से जो सबसे ज्यादा परेशान होते हैं तो वो हैं दुधारू पशु. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो गर्मी बढ़ने के साथ ही पशुओं का तनाव भी बढ़ जाता है. और जब पशु तनाव में हो तो उसे बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है. सूखा और हरा चारा कैसे और कब खि‍लाया जाए, पिलाने और नहलाने के लिए पानी का इस्तेमाल कैसे करें, इसका भी ख्याल रखना बहुत जरूरी हो जाता है. जून चल रहा है और कभी भी अल नीनो का असर देखने को मिल सकता है, इसलिए बहुत ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है. 

एक्सपर्ट के मुताबिक गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए साफ और ताजा पानी पीना बहुत जरूरी है. पानी ना पीने पर कई तरह की परेशानी हो सकती है. पशुओं के कई ऐसे लक्षण हैं जो शरीर में पानी की कमी को बताते हैं. लेकिन पीने के पानी का ख्याल रखा जाए तो पशु को बीमार होने और उत्पादन कम होने के नुकसान से बचा जा सकता है. क्योंकि लापरवाही के चलते पशु को हीट स्ट्रोक हो जाता है. 

पानी, सूखा-हरे चारे का ये है मैनेजमेंट 

  • पशुओं को सूखा भूसा 30 और हरा चारा 70 फीसद तक खिलाएं. 
  • पशुओं को ताजा भूसा खिलाने से पहले उसे भिगो लें. 
  • शाम को भिगोकर रखा गया भूसा पशुओं को सुबह ही खिलाएं. 
  • पशु के सामने हमेशा नमक की ढेली रखें, इसे चाटने से प्यास लगती है. 
  • पशुओं को दोपहर के वक्त छायादार जगह पर बांधना चाहिए. 
  • पानी की कमी होने पर पशु को नमक-चीनी का घोल पिलाएं. 
  • पशुओं को बार-बार पानी दिखाते रहें, फिर वो चाहें पीएं या नहीं. 
  • जहां तक मुमकिन हो पशुओं को ताजा और ठंडा पानी ही पिलाएं.
  • पशुओं के शरीर पर दिन में कम से कम तीन बार पानी छिड़कें. 
  • गर्मियों में पशुओं को सुबह-शाम नहलाना बहुत जरूरी है. 
  • जहां पशु बांधे जाते हैं वहां भी पानी का छिड़काव करें. 

पशुओं में ऐसे पहचानें पानी की कमी 

जब पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तो कई तरह के लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है. जैसे पशुओं को भूख नहीं लगती है. सुस्ती और कमजोर हो जाना. पेशाव गाढ़ा होना, वजन कम होना, आंखें सूख जाती हैं, चमड़ी सूखी और खुरदरी हो जाती है और पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब हम पशु की चमढ़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो वो थोड़ी देर से अपनी जगह पर वापस आती है.

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