Animal Disease: पेट खराब होने पर भी कम या बिल्कुल दूध नहीं देता है पशु, ऐसे करें इलाज 

Animal Disease: पेट खराब होने पर भी कम या बिल्कुल दूध नहीं देता है पशु, ऐसे करें इलाज 

Animal Disease पशु का पेट खराब होने का मतलब है पशु को अफरा होना. ये पशुओं की आम परेशानी है. गाय हो या भैंस, सभी में अफरा की परेशानी देखी जाती है. इसकी मुख्य वजह हरा चारा भी है. लेकिन जरूरी है कि पशु का पेट खराब होते ही उसका इलाज शुरू कर दिया जाए, नहीं तो पशु खाना-पीना छोड़ देता है.

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Animal Disease: पेट खराब होने पर भी कम या बिल्कुल दूध नहीं देता है पशु, ऐसे करें इलाज भैंसा गायब होने पर दिव्यांग की हत्या कर दी गई. (Photo: Representational )

पशु का कम दूध देना या अचानक से दूध देना बंद कर देना, इसकी बहुत सारी वजह होती हैं. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो इसमे जो बड़ी और खास वजह है वो पशु की खुराक है. अगर पशु की खुराक में जरूरत की चीजें शामिल नहीं की गईं तो उत्पादन घट जाएंगा और क्वालिटी भी खराब हो जाएगी. वहीं खुराक की तय मात्रा कम या ज्यादा हो गई तो इसका भी असर उत्पादन पर पड़ेगा. कई बार ऐसा भी होता है कि हरा चारा पशु का पेट खराब कर देता है. और जैसे ही पशु का पेट खराब होता है तो उत्पादन भी घट जाता है. 

क्योंकि दूध और बच्चा देने वाली गाय-भैंस हो या फिर नई उम्र का बढ़ता हुआ पशु, तीनों को ही जरूरत के हिसाब से एक खास खुराक की जरूरत होती है. एक्सपर्ट के मुताबिक दूध उत्पादन और पशु की ग्रोथ बढ़ाने के लिए ये बहुत जरूरी है कि पशु की पाचन क्रिया यानि उसका पेट सही रहे. क्योंकि पशु जरूरी तत्व जैसे वसा, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, खनिज लवण एवं विटामिन की जरूरत तभी पूरी कर पाएगा जब उसका पेट सही होगा.  

ये है पशु का पेट खराब होने की वजह 

  • रसदार हरा चारा जैसे रिजका, बरसीम ज्यादा खा लेने से. 
  • ज्यादा स्टार्च वाले अनाज गेहूं, मक्का, बाजरा ज्यादा मात्रा में खा लेने से. 
  • पशुओं की खुराक में अचानक परिवर्तन कर देने से हो सकता है.
  • गैस निकालने वाले रास्ते जैसे ग्रसिका में किसी भी प्रकार की रुकावट आ जाने पर.

ऐसे पता चलेगा पशु का पेट खराब है 

एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो पशु का पेट खराब यानि अफरा होने पर पशु के बाई और की साइड का पेट फूल जाता है. पेट का आकार बढ़ा हुआ दिखाई देता है. रूमन का गैसों से अधिक फूल जाने के कारण डायफ्राम पर दबाव पड़ता है. पशु को सांस लेने में दिक्कत होती है. पशु मुंह खोलकर जीभ बाहर निकालकर सांस लेता है. पशु बैचेन और सुस्त दिखाई देता है. बार-बार थोड़ा-थोड़ा गोबर-पेशाब करता है. 

पशु को अफरा हो तो ऐसे करें इलाज 

  • पशु को अफरा होने पर पशु का खाना बंद कर देना चाहिए.
  • पशु को ढलान वाली जगह पर खड़ा कर देना चाहिए. 
  • इससे पशु के आगे वाला हिस्सा ऊंचा रहेगा और पीछे वाला नीचे. 
  • ढलान पर खड़ा करने से डायाफ्राम पर रुमन का दबाव थोड़ा कम पड़ेगा. 
  • ढलान पर खड़ा करने से पशु को सांस लेने में परेशानी नहीं होगी. 
  • तारपीन का तेल 50 से 60 एमएल पानी में मिलाकर पिलाना चाहिए.
  • 50 ग्राम हींग, 20 ग्राम काला नमक, एक लीटर छाछ में डालकर पिलाएं.
  • तारपीन का तेल पशु को पानी में मिलाकर पिलाना चाहिए.
  • सरसों का तेल 100 एमएल तक दे सकते हैं.

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