गिर गाय एम्ब्रियो ट्रांसफरभ्रूण यानि बोवाइन एम्ब्रियो ट्रांसफर (ईटी) पशुपालन की एक उन्नत तकनीक है. डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि ये तकनीक न सिर्फ पशुपालन बल्कि डेयरी की तस्वीर को भी बदल देगी. इसे लेकर पशुपालकों के बीच जागरुकता भी आ रही है. सरकारी और प्राइवेट दोनों ही क्षेत्रों में इस पर हाई टेक्नोलॉजी के साथ काम हो रहा है. नई-नई ईटी लैब खुल रही हैं. लेकिन नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के प्रेसिडेंट डॉ. मीनेश शाह का कहना है कि इतना सब होने के बाद भी ईटी में पांच तरह की बड़ी परेशानियां सामने आ रही हैं.
उन्होंने कहा कि, ये सच है कि एम्ब्रियो ट्रांसफर देश के पशुधन क्षेत्र में आनुवंशिक प्रगति को तेज करने का एक शक्तिशाली साधन है. वहीं उन्होंने मजबूत IVF प्रयोगशालाओं, एम्ब्रियो उत्पादन में वृद्धि और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के बारे में भी बताया. वहीं एक अन्य एक्सपर्ट का कहना है कि विश्वस्तर पर ईटी तरक्की कर रहा है, लेकिन हमारे यहां राष्ट्रीय गोकुल मिशन होने के बाद भी इसे मदद नहीं मिल रही है.
‘भारत में बोवाइन एम्ब्रियो ट्रांसफर उद्योग: क्या हम एक चौराहे पर हैं?’ विषय पर बोलते हुए डॉ. मीनेश शाह ने बताया कि पशुपालक ईटी को अपना रहे हैं, लेकिन इसमे कुछ परेशानियां भी आ रही हैं. जैसे क्वालिटी वाले भ्रूण के लिए अच्छे डोनर मुश्किल से मिल रहे हैं. ईटी को अपनाने में लागत बहुत ज्यादा आ रही है. जमे (फ्रोजन) हुए एम्ब्रियो से गर्भधारण की दर बहुत कम है. एक्सपर्ट स्टाफ का मिलना मुश्किल हो गया है. अगर ये पांच परेशानियां दूर हो जाएं तो ईटी पशुपालकों के बीच और ज्यादा लोकप्रिय हो सकता है.
उत्तर- ईटी तकनीक में उच्च गुणवत्ता वाले गाय-भैंस से भ्रूण पैदा कर उन्हें ग्राही (रेसीपीएंट) गाय-भैंस के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है. ग्राही गाय-भैंस उसका पूर्ण गर्भकाल तक पालन करती है. यह एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले पशुओं से उनके पूरे जीवन काल में सामान्य से अधिक बच्चे पैदा लिए जा सकते है. ईटी एआई (कृत्रिम गर्भाधान) का विकल्प नहीं है. यह जरूरी नहीं कि एआई कराने के बाद बार-बार रिपीट होने वाली गाय-भैस पर ईटी पूरी तरह से कामयाब हो. अगर गाय-भैंस के गर्भाशय में कोई बीमारी या खराबी है तो ईटी तकनीक सफल नहीं होगी.
उत्तर- देश में ईटी की सुविधा कालसी फार्म, देहारादून (उत्तराखंड), साबरमती आश्रम गौशाला (बीडज, गुजरात), बुल मदर फार्म (हृष्ट, पश्चिम बंगाल), ईटी सेन्टर (नाभा, पंजाब) और बायफ (पुणे, महाराष्ट्र) द्वारा ईटी तकनीक की सुविधा दी जा रही है. इस तकनीक के लिए सभी केन्द्रों पर वीर्य (सीमेन) उत्पादन के लिए उच्च गुणवत्ता वाले सांड़ों को पैदा करते हैं. ईटी की सेवा व्यक्तिगत स्तर पर नहीं दी जाती है. ये सुविधा अभी सामान्यता बड़े फार्म वाली संस्थाओं को दी जा रही है. कीमत की बात करें तो ईटी की कीमत भ्रूण की नस्ल, उसकी गुणवत्ता और गर्भधारण की सफलता पर निर्भर करती है. सेक्स सॉर्टेड सीमन (वीर्य) द्वारा नर या मादा बच्चे में चुनाव की सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है.
एनिमल एक्सपर्ट डीके राही का कहना है कि आमतौर पर पशुपालक यही समझते हैं कि एआई और ईटी तकनीक एक ही है. लेकिन ऐसा नहीं है. एआई में सीमेन एक खास गन से पशु के अंदर पहुंचाया जाता है. जबकि ईटी में इस गन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. भूण का प्रत्यारोपण करने के लिए एक खास तकनीक इस्तेमाल की जाती है. इसलिए किसी भी ऐसे इंसान के झासे में ना आएं जो ये कहता हो कि वो एआई की गन से ईटी करा देगा.
ये भी पढ़ें- Breed Production: OPU-IVF से मां बनेंगी सड़क-खेतों में घूमने वाली छुट्टा गाय
ये भी पढ़ें- Egg Production: पोल्ट्री फार्म में कैसे बढ़ेगा अंडा उत्पादन, पढ़ें पोल्ट्री एक्सपर्ट के 10 टिप्स
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today