मुर्गी की वनराज नस्लसर्दी ने दस्तक देनी शुरू कर दी है. क्या इंसान और क्या पशु-पक्षी बदलता मौसम सभी को परेशान करता है. पोल्ट्री बर्ड मुर्गियां भी उसी में से एक हैं. मौसम गर्मी का हो या बरसात और सर्दी का, मुर्गियों को पोल्ट्री फार्म में एक तय मानक के मुताबिक ही तापमान चाहिए होता है. ना उससे ज्यादा और ना उससे कम. अगर तापमान जरा भी कम-ज्यादा होने लगता है तो उसका सीधा असर मुर्गियों और उनके उत्पादन पर पड़ता है. कई बार तो मुर्गियां तापमान कम-ज्यादा होने के चलते बीमार भी हो जाती हैं और इस बीमारी के चलते उनकी मौत तक हो जाती है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो मुर्गियां बहुत ही ज्यादा सेंसेटिव होती हैं. जबकि सर्दियों के मौसम से हर कोई अच्छी तरह से वाकिफ है. सर्दी मैदानी इलाके की हो या फिर पहाड़ी इलाके की, होती कड़ाके की है. ठंड के साथ घना कोहरा भी पड़ता है. कई बार तो कई-कई दिन तक सूरज भी नहीं निकलता है. कुछ जगह तो ऐसी भी हैं जहां तापमान दो से तीन डिग्री तक चला जाता है.
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पोल्ट्री एक्सपर्ट के मुताबिक मुर्गियों किसी भी तरह के मौसम में खुद को असहज महसूस करती हैं. और इसका सीधा असर अंडे और चिकन के उत्पादन पर पड़ता है. अंडे-चिकन का उत्पादन बना रहे इसके लिए सर्दी-गर्मी हर तरह के मौसम में मुर्गियों की जरूरत के हिसाब से तापमान को बनाए रखना जरूरी हो जाता है. यह जरूरी नहीं हैं कि मुर्गी साल के 365 दिन अंडा दे. पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो अंडा देने वाली लेयर बर्ड (मुर्गी) एक साल में 280 से 290 अंडे देती है. 85 से 75 दिन अंडा न देने के पीछे वैसे तो बहुत सारी वजह हैं, लेकिन रोजमर्रा की कुछ ऐसी भी बातें हैं जिनसे मुर्गी असहज महसूस करती है. मुर्गी एक बहुत ही सेंसेटिव बर्ड है. अगर इसकी रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ भी थोड़ा सा अलग होता है तो यह अंडा देना बंद कर देती है. ऐसा होने पर अब दो दिन बाद अंडा देगी या चार-छह और 10 दिन बाद यह भी मुर्गी पर ही निर्भर करता है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट मनीष शर्मा का कहना है कि अंडे देने वाली लेयर मुर्गियां हो या फिर ब्रॉयलर चिकन सभी को पोल्ट्री फार्म में 25 से 26 डिग्री तापमान की जरूरत होती है. अगर तापमान इससे कम या ज्यादा होता है तो मुर्गियां परेशान होने लगती हैं. मुर्गियों को मौसम की इस परेशानी से बचाने के लिए पोल्ट्री फार्म में तापमान बताने वाले उपकरण लगाए जाते हैं. जैसे सर्दी के मौसम में तापमान चार से पांच डिग्री तक चला जाता है. तो ऐसे तापमान में मुर्गियां ठंड की चपेट में न आएं और उन्हें गर्मी मिलती रहे इसके लिए फार्म में ब्रूडर लगाए जाते हैं. यह हीटर की तरह से काम करते हैं. ब्रूडर गैस और बिजली दोनों से ही काम करते हैं. ब्रूडर का इस्तेमाल खासतौर पर अंडे देने वाली लेयर मुर्गी के फार्म में किया जाता है. ब्रॉयलर चिकन के बड़े-बड़े फार्म में भी ब्रूडर का इस्तेंमाल होता है. लेकिन कुछ जगहों पर जहां संख्या कम होती है वहां लकड़ी का बुरादा और कोयले जलाकर भी ब्रॉयलर चिकन को गर्माहट दी जाती है.
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