Animal and Fodder: गर्मियों में गाय-भैंस को बहुत परेशान करती है पेट की ये आम बीमारी 

Animal and Fodder: गर्मियों में गाय-भैंस को बहुत परेशान करती है पेट की ये आम बीमारी 

Animal and Fodder खाने के बाद पशु को गैस पास नहीं हो रही है. पशु बैचेन हो रहा है. अगर ये लक्षण दिखाई दें तो समझ लें कि पशु अफरा से पीडि़त है. क्योंकि बार-बार चारा बदलने से पशु का पेट खराब हो जाता है. पशु के पेट में कुछ खराब गैस जैसे कार्बन-डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन-सल्फाइड, नाइट्रोजन और अमोनिया आदि बनने लगती हैं. 

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Animal and Fodder: गर्मियों में गाय-भैंस को बहुत परेशान करती है पेट की ये आम बीमारी गिर गाय एम्ब्रियो ट्रांसफर

खासतौर पर अप्रैल से लेकर जून तक हरे चारे की बहुत ज्यादा कमी रहती है. जो चारा बाजार में मौजूद भी होता है तो उसके दाम बढ़ जाते हैं. चारे की इसी कमी से निपटने के लिए पशुपालक हर संभव कोशि‍श करते हैं. बाजार में जो सस्ता चारा मिल जाए वहीं खि‍लाते हैं. इस चक्कर में पशुपालक कई-कई बार पशुओं के चारे में बदलाव करते रहते हैं. और चारे में होने वाले इस बदलाव का असर पशुओं की सेहत पर पड़ता है. जल्दी-जल्दी पशुओं का पेट खराब होने लगता है. अब इसे बीमारी कहें या बड़ी परेशानी, लेकिन इसके चलते पशु बैचेन हो जाता है. 

हालांकि गाय-भैंस हो या फिर भेड़-बकरी, सभी के बीच एक बीमारी बहुत आम है. वो खाना-पीना तक बंद कर देता है. इसे अफरा कहा जाता है. पशुओं को अफरा से बचाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकार का पशुपालन मंत्रालय भी पशुपालकों को जागरुक करता रहता है. विभाग ने अफरा से जुड़ी एडवाइजरी भी जारी की है. एडवाइजरी में पशुपालकों को अफरा से होने वाले नुकसान, पशु में अफरा की पहचान और उसके होने की वजह बताई हैं.

गर्मियों में ऐसे खि‍लाएं हरा चारा 

फीड एक्सपर्ट का कहना है कि हरे चारे में नमी की मात्रा बहुत होती है. पशु जब इस चारे को खाता है तो उसे डायरिया समेत पेट संबंधी और कई तरह की बीमारियां होने लगती हैं. कई बार डायरिया पशुओं के लिए जानलेवा हो जाता है. अब इस तरह की परेशानी से बचने के लिए पशुपालकों को करना ये चाहिए कि जब पशु को हरा चारा खाने में दें तो उसे सूखा चारा भी खि‍लाएं.

ऐसा करने के चलते चारे में मौजूद नमी की मात्रा कंट्रोल हो सकेगी. क्योंकि चारा खाने के बाद पशु पानी भी पीता है. इसके चलते पशु के दूध की क्वालिटी भी खराब हो जाती है. इसलिए ये जरूरी है कि सूखा चारा खि‍लाने के साथ-साथ हम उसे मिनरल्स जरूर दें. पीने का पानी भी साफ-सुथरा होना चाहिए. 

अफरा हो तो ऐसे करें इलाज

गाय-भैंस अफरा से पीडि़त हो, पेट फूल रहा हो और गैस पास नहीं हो रही हो तो फौरन ही घर पर इलाज शुरू कर सकते हैं. खास बात ये है कि इलाज का ज्यादातर सामान रसोई में ही मिल जाएगा. इसके साथ ही पशु के पेट को बायीं और पेड़ू के पास अच्छी तरह से मालिश करनी चाहिए. वहीं पशु को ऐसे स्थान पर बांधें जहां उसका यानि गर्दन वाला धड़ ऊंचाई पर हो.

टिंचर हींग - 15 मि.ली
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तेल तारपीन - 40 मिलीलीटर
अलसी का तेल - 500 मिली.

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