कम खर्च में करें इस पक्षी का पालनचिकन के साथ बटेर बड़ी तेजी से बाजार में अपनी जगह बना रही है. चिकन बेशक साल के 12 महीने हर मौसम में खाया जाता है, लेकिन बटेर को खासतौर से सर्दियों में बहुत पसंद किया जाता है. नंबर अभी कम है, लेकिन बटेर पालन तेजी से बढ़ रहा है. बाजार में बटेर के मीट और अंडों की खूब डिमांड रहती है. बटेर पालन कम लागत और कम जगह में शुरू हो जाता है. इस वजह से भी लोग इसे पसंद कर रहे हैं. राज्य की पोल्ट्री पॉलिसी और जरूरी लाइसेंस के बाद शुरू किया जा सकता है.
खास बात ये है कि मुर्गी पालन के मुकाबले बटेर पालन को सिर्फ 50 हजार रुपये की लागत पर शुरू किया जा सकता है. पोल्ट्री एक्सपर्ट के मुताबिक बटेर के मीट में पौष्टिकता के ज्यादातर गुण पाए जाते हैं. यही वजह है कि बटेर का मीट बाजार में खासा महंगा मिलता है.
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राज नारायण का कहना है कि बटेर का इस्तेमाल सिर्फ मीट और अंडे के लिए ही नहीं किया जाता है. बटेर से करीब पांच से छह तरह के प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं. लेकिन बटेर से प्रोडक्ट बनाने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत होती है. बरेली में ये ट्रेनिंग दी जाती है. बटेर के अंडे का अचार बहुत अच्छी रेसिपी मानी जाती है. बटेर का मीट चिकन बहुत महंगा मिलता है. चिकन दो से ढाई सौ रुपए किलो तक मिल जाता है. जबकि बटेर का मीट एक हजार रुपये से लेकर से 1200 रुपये किलो तक बिकता है. हालांकि मौसम के हिसाब से इसके दाम घटते-बढ़ते रहते हैं.
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