बकरीद पर कुर्बानी के लिए खास छह तरह की नस्ल के बकरों की डिमांड रहती है.बकरीद पर तीन दिन तक कुछ खास पशुओं की कुर्बानी दी जाती है. इसमे सबसे ज्यादा संख्या बकरों की होती है. इसके अलावा भेड़ और भैंसों की कुर्बानी भी दी जाती है. पशु कोई भी हो, लेकिन कुर्बानी करने वाले मुसलमान उसे बहुत ही जांच-परख के बाद खरीदते हैं. कई मानकों पर बकरों की जांच की जाती है. बकरों की कुर्बानी में ये कतई मायने नहीं रखता कि बकरा सस्ता है या महंगा. लेकिन हां, बकरा हैल्थी और स्वस्थ हो ये बहुत ही जरूरी है. बीमार न होना पहली शर्त है.
अगर बकरा खरीदते वक्त किसी भी एक मानक से समझौता किया तो वो कुर्बानी कुबूल नहीं होगी. बकरीद पर होने वाली बकरे की कुर्बानी के दौरान बकरे का खूबसूरत और तंदरुस्त होना जितना जरूरी है उससे कहीं ज्यादा उसका शारीरिक रूप से भी फिट होना बहुत जरूरी है. इसलिए बकरे को अच्छी तरह से चेक कर लेना चाहिए कि कही आपने चोटिल या अंग-भंग वाला बकरा तो नहीं खरीद लिया है.
बकरे बेचने वाले बकरे के साथ भी 420 का खेल खेलने लगे हैं. कमजोर बकरा भी खरीदार को मोटा-ताजी और तंदरुस्त दिखे इसके लिए बकरे में कई तरह के खेल किए जाते हैं. जैसे बकरे को मोटा दिखाने के लिए उसे जरूरत से ज्यादा पानी पिला देते हैं. अब आप कहेंगे कि बकरा कैसे ज्यादा पानी पी लेता है. तो खेल ये कि बकरा पालक बकरे को एक ऐसी दवाई खिलाते हैं जिससे उसका गला खुश्क हो जाता है.
ऐसे में जब बकरा पानी मांगता है तो उसके मुंह से दो लीटर की बोतल लगा दी जाती है. और बकरा गटागट पानी पीए जाता है. ऐसे बकरों की पहचान ये है कि ज्यादा पानी पीने के बाद बकरा जुगाली नहीं कर पाता है. आप गौर करें तो बकरा अगर 15-20 मिनट तक जुगाली नहीं करता है तो समझ लें कि बकरे को जरूरत से ज्यादा पानी पिलाया गया है.
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