बकरीद पर कुर्बानी के लिए खास छह तरह की नस्ल के बकरों की डिमांड रहती है.बेशक बकरी पालन में लगातार दूध की डिमांड बढ़ रही है. लेकिन आज भी सबसे ज्यादा बकरी पालन मीट के लिए किया जाता है. बकरीद पर बकरों की बहुत डिमांड रहती है. एक-डेढ़ साल पहले से ही बकरीद के लिए बकरों की तैयारी शुरू हो जाती है. बकरी पालक समेत बहुत सारे लोग बकरी के बच्चे पालना शुरू कर देते हैं. तीन-चार महीने का बच्चा लेकर पाला जाता है, जो बकरीद तक एक साल से ऊपर का हो जाता है. लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी बात ये है कि बच्चों को हेल्दी रखा जाए. बच्चे बीमार न हों.
क्योंकि बकरीद पर बीमार और कमजोर बकरों की कुर्बानी नहीं होती है. खासतौर पर मॉनसून के दौरान पाले गए बकरों को बीमारियों से बचाना बहुत जरूरी हो जाता है. गोट एक्सपर्ट के मुताबिक टीकारण करवाकर बकरे-बकरियों को खुरपका, बकरी की चेचक, बकरी की प्लेग जैसी बीमारियों समेत पैरासाइट से बचाया जा सकता है. जरूरत बस अलर्ट रहने की है. जरा सी भी लापरवाही होने पर एक बकरी में हुई बीमारी पूरे फार्म में फैल सकती है.
गोट एक्सपर्ट की मानें तो उम्र, मौसम और बीमारी के हिसाब से बकरियों को तमाम तरह की बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण सीआईआरजी की ओर से जारी किए गए चार्ट को देखकर ही कराना चाहिए. जैसे,
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