Goat Vaccination: बकरीद के लिए बकरे पाल रहे हैं तो बीमारियों से बचाने को लगवाएं ये टीके 

Goat Vaccination: बकरीद के लिए बकरे पाल रहे हैं तो बीमारियों से बचाने को लगवाएं ये टीके 

Goat Vaccination बकरे-बकरियों की मृत्यु दर ही बकरी पालन का मुनाफा और नुकसान तय करती है. अगर वक्त से बकरों की जांच हो जाए, तय वक्त पर टीका लग जाए और बीमार होने पर सही इलाज करा दिया जाए तो मुनाफे को बढ़ाया जा सकता है. तमाम तरह की बीमारियों से सिर्फ टीकाकरण ही बचाता है. और अगर अभी टीकाकरण नहीं करवाया है तो आज भी करा सकते हैं. 

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Goat Vaccination: बकरीद के लिए बकरे पाल रहे हैं तो बीमारियों से बचाने को लगवाएं ये टीके बकरीद पर कुर्बानी के लिए खास छह तरह की नस्ल के बकरों की डिमांड रहती है.

बेशक बकरी पालन में लगातार दूध की डिमांड बढ़ रही है. लेकिन आज भी सबसे ज्यादा बकरी पालन मीट के लिए किया जाता है. बकरीद पर बकरों की बहुत डिमांड रहती है. एक-डेढ़ साल पहले से ही बकरीद के लिए बकरों की तैयारी शुरू हो जाती है. बकरी पालक समेत बहुत सारे लोग बकरी के बच्चे पालना शुरू कर देते हैं. तीन-चार महीने का बच्चा लेकर पाला जाता है, जो बकरीद तक एक साल से ऊपर का हो जाता है. लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी बात ये है कि बच्चों को हेल्दी रखा जाए. बच्चे बीमार न हों. 

क्योंकि बकरीद पर बीमार और कमजोर बकरों की कुर्बानी नहीं होती है. खासतौर पर मॉनसून के दौरान पाले गए बकरों को बीमारियों से बचाना बहुत जरूरी हो जाता है. गोट एक्सपर्ट के मुताबिक टीकारण करवाकर बकरे-बकरियों को खुरपका, बकरी की चेचक, बकरी की प्लेग जैसी बीमारियों समेत पैरासाइट से बचाया जा सकता है. जरूरत बस अलर्ट रहने की है. जरा सी भी लापरवाही होने पर एक बकरी में हुई बीमारी पूरे फार्म में फैल सकती है. 

किस बीमारी का कौनसा टीका कब लगेगा

गोट एक्सपर्ट की मानें तो उम्र, मौसम और बीमारी के हिसाब से बकरियों को तमाम तरह की बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण सीआईआरजी की ओर से जारी किए गए चार्ट को देखकर ही कराना चाहिए. जैसे, 

  • खुरपका- 3 से 4 महीने की उम्र पर. बूस्टर डोज पहले टीके के 3 से 4 हफ्ते बाद. 6 महीने बाद दोबारा. 
  • बकरी चेचक- 3 से 5 महीने की उम्र पर. बूस्टर डोज पहले टीके के एक महीने बाद. हर साल लगवाएं. 
  • गलघोंटू- 3 महीने की उम्र पर पहला टीका. बूस्टर डोज पहले टीके के 23 दिन या 30 दिन बाद. 
  • कुकडिया रोग- दो से तीन महीने की उम्र पर दवा पिलाएं. 3 से 5 दिन तक पिलाएं. 6 महीने की उम्र पर दवा पिलाएं. 
  • डिवार्मिंग- 3 महीने की उम्र में दवाई दें. बरसात शुरू होने और खत्म होने पर दें. सभी पशुओं को एक साल दवा पिलाएं. 
  • डिपिंग- दवाई सभी उम्र में दी जा सकती है. सर्दियों के शुरू में और आखिर में दें. सभी पशुओं को एक साथ नहलाएं.
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  • ब्रुसेलोसिस- 6 महीने और 12 महीने की उम्र पर जांच कराएं. जो पशु संक्रमित हो चुका है उसे गहरे गड्डे में दफना दें.  
  • जोहनीज (जेडी)- 6 महीने और 12 महीने की उम्र पर जांच कराएं. संक्रमित पशु को फौरन ही झुंड से अलग कर दें. 
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  • पीपीआर (बकरी प्लेग)- 3 महीने की उम्र पर. बूस्टर की जरूरत नहीं है. 3 साल की उम्र पर दोबारा लगवा दें. 
  • इन्टेरोटोक्समिया- 3 से 4 महीने की उम्र पर. बूस्टर डोज पहले टीके के 3 से 4 हफ्ते बाद. हर साल एक महीने के अंतर पर दो बार. 

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