Goat Vaccination: बरसात में बीमारियों से बची रहेंगी बकरियां, वक्त से लगवा लें ये टीके

Goat Vaccination: बरसात में बीमारियों से बची रहेंगी बकरियां, वक्त से लगवा लें ये टीके

Goat Vaccination गोट एक्सपर्ट के मुताबिक बकरियों की मृत्यु दर ही बकरी पालन का मुनाफा और नुकसान तय करती है. वक्त से बकरियों की जांच हो जाए और तय वक्त पर टीका लग जाए तो मुनाफे को बढ़ाया जा सकता है. क्योंकि बरसात के मौसम में बकरियों को तमाम तरह की बीमारियों से सिर्फ टीकाकरण ही बचाता है. 

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Goat Vaccination: बरसात में बीमारियों से बची रहेंगी बकरियां, वक्त से लगवा लें ये टीकेस्टाल फीड करतीं जखराना नस्ल की बकरियां. फोटो क्रेडिट-किसान तक

बकरे-बकरियों को होने वाली कई ऐसी बीमारियां हैं जो संक्रमण से होती हैं. और खास बात ये है कि जानलेवा होने के बावजूद इन बीमारियों का कोई इलाज नहीं है. लेकिन, इतना जरूर है कि बीमारियों से बचाने के लिए इन्हें टीके लगवाए जा सकते हैं. इसके अलावा पशुपालक बरसात के मौसम में थोड़ा सा अलर्ट हो जाएं तो पशुओं को जानलेवा बीमारियों से बचाया जा सकता है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो बरसाती बीमारियों की रोकथाम के लिए देखभाल संग टीकाकरण सबसे बढि़या उपाय है. 

बकरियों के मामले में भी इसे अपनाया जा सकता है. क्योंकि टीकारण करवाकर बकरे-बकरियों को खुरपका, बकरी की चेचक, बकरी की प्लेग जैसी बीमारियों समेत पैरासाइट से बचाया जा सकता है. जरूरत बस अलर्ट रहने की है. जरा सी भी लापरवाही होने पर एक बकरी में हुई बीमारी पूरे फार्म में फैल सकती है. 

किस बीमारी का टीका कब लगेगा

गोट एक्सपर्ट और साइंटिस्ट की मानें तो उम्र, मौसम और बीमारी के हिसाब से बकरियों को तमाम तरह की बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण सीआईआरजी की ओर से जारी किए गए चार्ट को देखकर ही कराना चाहिए. जैसे, 

खुरपका- 3 से 4 महीने की उम्र पर. बूस्टर डोज पहले टीके के 3 से 4 हफ्ते बाद. 6 महीने बाद दोबारा. 
बकरी चेचक- 3 से 5 महीने की उम्र पर. बूस्टर डोज पहले टीके के एक महीने बाद. हर साल लगवाएं. 
गलघोंटू- 3 महीने की उम्र पर पहला टीका. बूस्टर डोज पहले टीके के 23 दिन या 30 दिन बाद. 

पैरासाइट 

  • कुकडिया रोग- दो से तीन महीने की उम्र पर दवा पिलाएं. 3 से 5 दिन तक पिलाएं. 6 महीने की उम्र पर दवा पिलाएं. 
  • डिवार्मिंग- 3 महीने की उम्र में दवाई दें. बरसात शुरू होने और खत्म होने पर दें. सभी पशुओं को एक साल दवा पिलाएं. 
  • डिपिंग- दवाई सभी उम्र में दी जा सकती है. सर्दियों के शुरू में और आखिर में दें. सभी पशुओं को एक साथ नहलाएं. 

रेग्यूलर जांच

  • ब्रुसेलोसिस- 6 महीने और 12 महीने की उम्र पर जांच कराएं. जो पशु संक्रमित हो चुका है उसे गहरे गड्डे में दफना दें.  
  • जोहनीज (जेडी)- 6 महीने और 12 महीने की उम्र पर जांच कराएं. संक्रमित पशु को फौरन ही झुंड से अलग कर दें. 

टीकाकरण कार्यक्रम 

  • पीपीआर (बकरी प्लेग)- 3 महीने की उम्र पर. बूस्टर की जरूरत नहीं है. 3 साल की उम्र पर दोबारा लगवा दें. 
  • इन्टेरोटोक्समिया- 3 से 4 महीने की उम्र पर. बूस्टर डोज पहले टीके के 3 से 4 हफ्ते बाद. हर साल एक महीने के अंतर पर दो बार.

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