Cold Impact on Calf: ठंड और बदलते मौसम में नए जन्मे बच्चे की ऐसे करें देखभाल

Cold Impact on Calf: ठंड और बदलते मौसम में नए जन्मे बच्चे की ऐसे करें देखभाल

Cold Impact on Calf आमतौर पर पशुपालक ये मानते हैं कि पशुपालन में सिर्फ दूध बेचकर ही मुनाफा होता है. जबकि रीप्रोडक्शन (प्रजनन) भी पशुपालक के मुनाफे का एक बड़ा जरिया है. ये बात भी सही है कि हर पशुपालक चाहता है कि उसकी गाय या भैंस हर साल बच्चा दे. लेकिन बछड़ों को मौसम क विपरीत असर से बचाना भी बहुत मुश्किल काम होता है. 

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Cold Impact on Calf: ठंड और बदलते मौसम में नए जन्मे बच्चे की ऐसे करें देखभालगायों की खास देखभाल

जनवरी का महीना खत्म हो चुका है. लेकिन ठंड का असर अभी कम नहीं हुआ है. मौसम बार-बार अपना रंग बदल रहा है. एकदम से निकली चमकती धूप को देखकर लगता है कि अब ठंड कम हो जाएगी. लेकिन हल्की सी बारिश और सुबह-शाम में कोहरे के चलते तापमान फिर से गिर जाता है. इस तरह का मौसम जितना इंसानों को नुकसान पहुंचाने वाला होता है, उतना ही पशुओं को भी परेशान करता है. खासतौर से इसके चलते पशुओं का उत्पादन कम हो जाता है. नए जन्म लेने वाले बछड़ों के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल होती है. दूध के अलावा पशुपालन में बछड़ों से भी बड़ा मुनाफा होता है, इसलिए एनिमल एक्सपर्ट साइंटीफिक तरीके से पशुपालन करने की सलाह देते हैं. 

अगर साइंटीफिक तरीके से बछड़ों का पालन किया तो उन्हें दूध उत्पादन के लिए बाड़े में शामिल किया जा सकता है. इतना ही नहीं बड़ा करके उन्हें बाजार में भी बेच सकते हैं. सर्दियों के मौसम में गाय-भैंस के बछड़े होते ही उसे ठंड से बचाने के लिए जरूरी देखभाल की जरूरत होती है. अगर इसमें जरा सी भी लापरवाही बरती गई तो बच्चे की जन्म के साथ ही मौत भी हो सकती है. और देखभाल मानकों के मुताबिक की जाए तो बच्चा छह महीने का होते ही मुनाफा देने वाला बन जाता है. 

बछड़ें को चाट कर ठंड से बचाती है गाय 

  • जन्म के फौरन बाद बच्चे को ज्यादातर भैंस के सामने रखें. 
  • बच्चा सामने होने पर भैंस उसे चाटकर साफ करती है. 
  • बच्चे को चाटने से उसकी त्वचा जल्दी सूख जाती है.
  • भैंस द्वारा बच्चे को चाटने पर उसके शरीर का तापमान नहीं गिरता है. 
  • चाटने से बच्चे का शरीर साफ हो जाता है खून दौड़ने लगता है. 
  • चाटने से भैंस और बच्चे के बीच दुलार बढ़ता है.
  • बच्चे को चाटने से भैंस को सॉल्ट और प्रोटीन मिलता है. 
  • भैंस बच्चे को नहीं चाटती है तो उसे साफ तौलिए से रगड़ दें.

जरूरी है जन्म के बाद सही तरह से ले सांस

  • जन्म लेते ही बच्चे के ऊपर से जेर-झिल्ली हटा दें. 
  • बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो तो उसकी छाती की मालिश कर दें. 
  • ठीक से सांस ना आने पर बच्चे की पिछली टांगें पकड़ कर उल्टा लटकाएं.
  • नये ब्लेड या गर्म पानी में साफ की गई कैंची से बच्चे की नाल काट दें. 
  • जिस जगह से नाल काटी गई है वहां टिंचर आयोडीन लगा दें.
  • बच्चे को सर्दी से बचाने के संसाधनों का इंतजाम करें. 

बछड़े को तरीके से पिलाएं दूध-खीस 

  • जन्म लेने के एक-दो घंटे के अंदर बच्चे को भैंस की खीस जरूर पिलाएं. 
  • बच्चे को खीस पिलाने के लिए भैंस की जेर गिरने का इंतजार ना करें.
  • बच्चे को वक्त से पिलाया गया खीस बीमारियों से लड़ने में मदद करता है.
  • बच्चे को उसके वजन का 10 फीसद दूध पिलाना चाहिए. 
  • बच्चे को सुबह-शाम दो बार में दूध पिलाना चाहिए. 
  • पहला दूध पीने के बाद बच्चे का दो घंटे के अंदर गोबर करना जरूरी है. 

जरूरी है पेट के कीड़ों की दवाई

10 दिन की उम्र पर बच्चे को पेट के कीड़ों की दवा जरूर पिला दें. 
पेट के कीड़ों की दूसरी खुराक बच्चे को 21 दिन की उम्र पर पिलाएं.   

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