
जून में अल नीनो का प्रभाव देखने को मिल सकता है, इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. मौसम विभाग से लेकर एक्सपर्ट तक इस पर अपनी अलग-अलग राय रख रहे हैं. हर कोई अपने हिसाब से अल नीनो की तैयारी कर रहा है. जो पशुपालन और डेयरी से जुड़े एक्सपर्ट अपनी अलग राय दे रहे हैं. उनका कहना है कि अगर अल नीनो के दौरान पशुओं की देखभाल का तरीका बदला तो दूध उत्पादन को घटने से रोका जा सकता है. क्योंकि गर्मी तो पशुओं को परेशान करती ही है, लेकिन अलनीनो के प्रभाव में आते ही पशुओं की जान पर बन आती है.
अलनीनो के चलते पशुओं को जहां कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, वहीं पीने के पानी और हरे चारे तक की कमी हो जाती है. इसलिए ये बहुत जरूरी हो जाता है कि आने वाले दिनों में पशुओं की खुराक और पीने के पानी को लेकर खासे अलर्ट हो जाएं. किसी भी हाल में पशुओं की खुराक कम न होने दें और पीने का पानी तो हर वक्त उनके आसपास ही उपलब्ध रहना चाहिए.
गौशाला में छाया के लिए शेड और ग्रीन नेट की व्यवस्था कर सकते हैं.
गौशाला में पंखे, कूलर या फॉगिंग सिस्टम लगवा सकते हैं.
गौशाला के फर्श पर पानी का छिड़काव करते रहें.
गौशाला में हमेशा साफ और ठंडा पानी रखें.
गौशाला में पानी के टैंक या टंकी की स्टोरेज क्षमता बढ़ा दें.
टंकी के पानी को दिन में 3-4 बार चेक करें.
हरा चारा (जैसे बरसीम, नेपियर) का स्टॉक करके रखें.
सूखे के समय के लिए साइलेज और भूसा सुरक्षित रखें.
गायों को मिनरल मिक्सचर और नमक खाने को जरूर दें.
गर्मी में होने वाली बीमारियों (हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन) पर अलर्ट रहें.
गायों की पशु चिकित्सक से नियमित रूप से जांच करवाते रहें.
गायों को खुराक संग ORS या इलेक्ट्रोलाइट्स पानी में मिलाकर दें.
गोशाला में हवा का अच्छा आवागमन रखें.
गौशाला के फर्श से गोबर और गंदगी साफ करते रहें.
गौशाला में मच्छर, मक्खी और किलनी को नियंत्रित करें.
गोशाला के आसपास नीम, पीपल आदि के पेड़ लगाए.
हरियाली होने से तापमान कम और वातावरण ठंडा रहेगा.
गौशाला में पानी और चारे का बैकअप प्लान रखें.
बिजली जाने पर वैकपिक व्यवस्था (जनरेटर आदि) रखें.
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