सर्दियों में पशुओं का दूध बढ़ाने के उपायडेयरी एक्सपर्ट की मानें तो देश में करीब 8 करोड़ परिवार पशुपालन और उससे संबंधित काम से जुड़े हुए हैं. इसमे बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जिनके पास सिर्फ चार से पांच पशु यानि गाय-भैंस ही हैं. लेकिन चार-पांच पशु होने का मतलब ये नहीं है कि इनसे मुनाफा नहीं होगा. कम संख्या वाले पशुओं से ज्यादा मुनाफा कमाने का एक अलग तरीका है. अगर पशुओं के बाड़े (शेड) में गाय-भैंस की संख्या कम है और मुनाफा कम हो रहा है तो ये कोई बड़ी परेशानी नहीं है. जरूरत बस काम करने के तरीके को बदलने की है.
इसके लिए लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हरियाणा के एक्सपर्ट महिलाओं को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं. उनका कहना है कि अगर महिलाएं लुवास के बताए तरीकों से पशुपालन करेंगी तो वो चार-पांच पशुओं से भी बड़ा मुनाफा कमा सकती हैं. जरूरत बस इतनी है कि गांव की महिलाएं मिलकर महिला किसान उत्पादक संगठनों (WFPO) का गठन करें और उसी के तहत पशुपालन करें.
लुवास के एक्सपर्ट का कहना है कि डब्ल्यूएफपीओ को पशु दूध से बने प्रोडक्ट जैसे खोया, पनीर और घी आदि के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. पशुपालन क्षेत्र का ज्यादातर काम महिलाओं के जिम्मे रहता है. महिलाओं का पशुपालन में महत्वपूर्ण योगदान है. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर पशुपालक महिलाएं किसान उत्पादक समूह बनाकर अगर दूध से घी बनाना ही शुरू कर दें तो मोटी कमाई हो सकती है.
लेकिन साथ ही ये भी जरूरी है कि घी की मार्केटिंग की जाए. ऐसा करने से प्रोडक्ट की बिक्री बढ़ जाती है और इनकम भी कई गुना तक हो जाती है. आज बाजारीकरण के युग में हर प्रोडक्ट का रेट और उसकी क्वालिटी ब्रांड पर निर्भर होती है. ऐसे में अगर महिलाएं कम पशु रखते हुए भी समूह बनाकर काम करें तो ज्यादा मुनाफा ले सकती हैं.
इंडियन डेयरी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. आरएस सोढ़ी का कहना है, ‘उम्मीद है कि भारत में दूध उत्पादन इसी तरह से बढ़ता रहेगा. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि दूध और उससे बने आइटम की खपत भी बढ़ाई जाए. इसके लिए सबसे बेहतर प्रोडक्ट है घी. हमे घी पर काम करने की जरूरत है. घी एक आयुर्वेद प्रोडक्ट है. जब इटली ऑलिव आयल के लिए और स्विट्जरलैंड चॉकलेट के लिए अपनी पहचान बना सकता है तो भारत भी घी में विश्व स्तर पर अपनी पहचान कायम कर सकता है.’
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