
क्रिसमस और न्यू ईयर की आहट से ही पार्टियों का सिलसिला शुरू हो जाता है. खाने-खिलाने का दौर चलता है. हफ्तों तक पार्टियां चलती हैं. और इन्हीं पार्टियों में शामिल रहता है चिकन. नॉनवेज खाने वालों के लिए चिकन के बिना पार्टी अधूरी रहती है. यही वजह है कि दिसम्बर-जनवरी में चिकन की खूब बिक्री होती है. बाजार में लगातार चिकन की डिमांड बनी रहती है. और चिकन बेचने वाले कुछ मिलावटखोर इसी डिमांड का फायदा उठाते हैं. चिकन के लिए ब्रायलर मुर्गे पाले जाते हैं. लेकिन मिलावटखोर ब्रायलर मुर्गे की जगह अंडे देने वाली लेअर मुर्गी बेच देते हैं. ब्रायलर मुर्गे के मुकाबले लेअर मुर्गी बहुत सस्ती मिलती है. इसी का फायदा उठाने के लिए मिलावटखोर मुर्गे की जगह मुर्गी बेच देते हैं.
जिंदा मुर्गे में भी मिलावट हो सकती है. बेशक ये नामुमकिन सी बात लगती हो, लेकिन ये हकीकत है. जब अंडा देने वाली मुर्गी अंडा देना बंद या बहुत कम कर देती है तो उसे कटने के लिए बेच दिया जाता है. चिकन के लिए ब्रालयर मुर्गा पाला जाता है. 30 दिन में ब्रायलर चूजा 900 से 1150 ग्राम का हो जाता है. आमतौर पर 40 दिन तक का मुर्गा बाजार में बेच दिया जाता है. ये चिकन में इस्तेमाल होता है. वजन के हिसाब से इसके रेट तय होते हैं. जबकि अंडा देने वाली मुर्गी तीन से साढ़े तीन साल तक अंडा देती है और उसके बाद रिटायर हो जाती है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट अजय सिंह ने किसान तक को बताया कि ब्रायलर चिकन वो है जो बाजारों में चिकन फ्राई, चिकन टंगड़ी, चिकन टिक्का और तंदूरी चिकन के नाम से बिकता है. चिकन बिरयानी भी इसी की बनती है. खासतौर पर चिकन करी के लिए घरों में भी यही बनाया जाता है. बाजार में आजकल फ्रेश ब्रायलर चिकन का भाव 200 रुपये किलो से लेकर 350 रुपये तक चल रहा है.
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