अंडे और चिकन का एक्सपोर्ट बढ़ाने की कोशिशें चल रही हैं. फोटो क्रेडिट-किसान तकखाड़ी के देशों को भारत से अंडे एक्सपोर्ट किए जाते हैं. हालांकि रोजाना जाने वाले अंडों की संख्या बहुत कम है, लेकिन जो भी है उसके चलते भारत के पोल्ट्री बाजार में एक अजीब से बैचेनी है. एक्सपोर्टर अैर पोल्ट्री फार्मर दोनों डरे हुए हैं. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अंडों से भरे 80 कंटेनर कोच्चि से वेस्ट एशिया जाने थे. लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए पोर्ट ऑथारिटी ने वाले अंडों से भरे कंटेनरों को मुंबई पोर्ट की ओर भेज दिया है. ऐसा होने से नमक्कल, तमिलनाडु के किसानों और एक्सपोर्टर्स को डर सताने लगा है.
उन्होंने एपीडा से इसे पूरे मामले में दखल देने की मांग की है. उनकी मांग है कि ये भरोसा दिलाया जाए कि कंटेनर तय जगहों पर पहुंच जाएंगे. उन्हें डर है कि यहां-वहां कंटेनर भटकने से कहीं तय वक्त के बाद अंडे खराब होना शुरू न हो जाएं. गौरतलब रहे ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रही लड़ाई के चलते कार्गों में परेशानी आ रही है. शिप का संचालन हो नहीं रहा है. कार्गों पोर्ट ने कंटेनर लेने से अब इंकार कर दिया है.
ऑल इंडिया पोल्ट्री एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी वलसन परमेश्वरन ने मीडिया में बताया है कि लड़ाई ने एक बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है. कोई भी पोर्ट कंटेनर नहीं ले रहा है क्योंकि कोई शिपिंग लाइन नहीं चल रही है. बीते 10 दिन पहले हमने कोच्चि से दुबई, बहरीन, ओमान और वेस्ट अफ्रीका जैसी अलग-अलग जगहों के लिए अंडों के करीब 80 कंटेनर भेजे थे. लेकिन लड़ाई के चलते जहाजों को मुंबई के नवा शेवा पोर्ट की ओर मोड़ दिया गया है, जहां से हमें कंटेनर ले जाने के लिए कहा गया क्योंकि शिपिंग लाइनें आगे नहीं बढ़ सकतीं हैं. हमने इस मामले में एपीडा से भी दखल देने की मांग की है.
पोल्ट्री फार्मर और एक्सपोर्टर ने एसी कंटेनर से अंडा दूसरे देशों को भेजा था, लेकिन अब वो कंटेनर वापस लेने पड़ेंगे, क्योंकि जहाज आगे नहीं जा रहे हैं. पोल्ट्री एक्सपर्ट बताते हैं कि अंडा जब तक एसी कंटेनर में रहेगा तो खराब नहीं होगा. लेकिन जैसे ही कंटेनर से अंडा निकला तो उसे जल्द से जल्द इस्तेमाल करना होगा. एसी कंटेनर से निकलने के बाद अंडा 30 से 40 दिन तक ही सही रहता है. उसके बाद अंडा खराब होना शुरू हो जाता है.
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