
केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में भारत में करीब 25 हजार करोड़ अंडों का उत्पादन हुआ था. बाजार में एक अंडे की वर्तमान कीमत 8 से 9 रुपये है. पोल्ट्री एक्सपर्ट का दावा है कि ये पहला मौका है जब अंडा 8 रुपये का बिक रहा है और पोल्ट्री फार्मर को लागत के हिसाब से ठीक-ठाक मुनाफा हो रहा है. लेकिन हैरत की बात ये है कि देश में जिस अंडे को महंगा बताया जा रहा है वो दुनिया का सबसे सस्ता अंडा है. दूसरे कई देशों में भारत के मुकाबले कई गुना महंगा अंडा बिक रहा है.
और ये तब है जब महंगा अंडा बेचने वालों के मुकाबले भारत में सबसे महंगा पोल्ट्री फीड बिक रहा है. अगर दो-चार देशों को छोड़ दें तो विश्व का सबसे महंगा पोल्ट्री फीड भारत में बिक रहा है. ऐसा नहीं है कि पोल्ट्री फीड में शामिल मक्का और सोयाबीन का उत्पादन भारत में नहीं होता है. लेकिन वहां भी किसानों की लागत इतनी ज्यादा है कि मक्का और सोयाबीन की वजह से ही पोल्ट्री फीड महंगा हो जाता है.
भारतीय पोल्ट्री फार्मर अमेरिका और ब्राजील के किसानों मुकाबले मक्का के लिए 35 से 50 फीसद ज्यादा दाम चुका रहे हैं. सोयाबीन मील के मामले में भी हालात कोई अलग नहीं हैं. साल 2021-22 के संकट के बाद भारत में कीमतें 84000 रुपये मीट्रिक टन तक बढ़ गईं थी. जिसके बाद GM सोयाबीन मील इंपोर्ट करनी पड़ी थी.
प्रेसिडेंट सुरेश चित्तुरी का कहना है कि देश में फीड लागत की परेशानी अचानक से सामने नहीं आई है. ये सब पॉलिसी की वजह से हो रहा है. इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है.
भारत में अभी भी फीड के लिए जीएम मक्का और जीएम सोया पर बैन लगा हुआ है. अमेरिका और ब्राजील 90 फीसद जीएम क्षेत्र में खेती करते हैं, जिससे 20 से 30 फीसद ज़्यादा पैदावार होती है जो लागत को कम कर देती है.
देश में 80 लाख से एक करोड़ टन मक्का इथेनॉल में जा रहा है. जिसके चलते फीड में सप्लाई कम हो रही है. जबकि 2024 से मक्के की कीमत 14 फीसद तक बढ़ गई हैं. इन्हीं सब चीजों का नतीजा है कि भारतीय पोल्ट्री फार्मर अपना मुख्य कच्चा माल विश्व की ऊंची कीमतों पर खरीदते हैं, जबकि बाजार में प्रोडक्ट बेचने पर उन्हें कोई खास फायदा नहीं मिलता है.
इंटरनेशन ऐग कमीशन के प्रेसिडेंट और श्रीनिवास ग्रुप के एमडी सुरेश चित्तुरी का कहना है कि अगर सरकार पोल्ट्री फार्मर को राहत दे तो पोल्ट्री प्रोडक्शन अंडे-चिकन का उत्पादन और बढ़ सकता है. और सस्ता अंडा उत्पादन करने का फायदा हम इंटरनेशनल मार्केट में उठा सकते हैं. अभी नाम मात्र के आंकड़े के साथ अंडा एक्सपोर्ट हो रहा है.
पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के ज्वाइंट सेक्रेटरी रिकी थापर का कहना है कि भारत में लेबर सस्ती है तो इसके चलते भी अंडे के दाम कम रहते हैं. जबकि दूसरे देशों में पोल्ट्री फार्म में काम करने वाली और फार्म का शेड तैयार करन वाली हर तरह की लेबर महंगी है.
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