One of the biggest concerns with ghee is its fat profile. Around 62% of the fat in ghee is saturated fat. जंक फूड के जमाने में देसी घी को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. अब देश में घी की खपत बढ़ रही है. हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि कोविड के बाद से लोग खानपान को पहले से थोड़े सतर्क हो गए हैं. इसलिए मक्खन और रिफाइंड तेल के मुकाबले देसी घी की खपत बढ़ रही है. अपने गुणों की वजह से आयुर्वेद में घी को दवा का दर्जा मिला हुआ है. नई पीढ़ी भी इसका महत्व समझ रही है, जिसकी वजह से बीते चार साल में घी की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ी है. एक्सपोर्ट की तो छोड़िए घरेलू बाजार में घी की डिमांड बहुत ज्यादा है. प्रति व्यक्ति सालाना घी की खपत 3.27 किलोग्राम हो गई है. भारत में गिर गाय का घी, देसी गाय घी, हिमालयन घी, बिलोना घी और भैंस का घी लोकप्रिय है.
घी के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ने से भारतीय डेयरी सेक्टर में एक नई उम्मीद जगी है. जीएसटी कम होने से घी के दाम छह से 10 फीसदी तक कम हो गए हैं. इससे खपत और बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है. भारत लगभग 1500 करोड़ रुपये का घी एक्सपोर्ट भी कर रहा है. कई बड़े देश भारतीय घी के मुरीद बनकर उभरे हैं. खासतौर पर खाड़ी देश. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भारत से साल 2023-24 में तीन करोड़ डॉलर का घी खरीदा था. यूएई भारतीय घी का सबसे बड़ा खरीदार है.
मार्केट इंटेलिजेंस फर्म iMARC (Market Research Company, Reports and Consulting Services) की ओर से जारी रिपोर्ट की मानें तो साल 2014 में प्रति व्यक्ति देसी घी की खपत सिर्फ 2.68 किलोग्राम थी. जबकि 2023-24 में यह 3.27 किलोग्राम हो गई है. वहीं साल 2034 तक इसके चार किलो प्रति व्यक्ति खपत होने की उम्मीद जताई जा रही है. घी की डिमांड तेजी से बढ़ने के साथ अब एक और वजह जुड़ गई है और वो है घी पर जीएसटी का कम होना. भारत का घी बाजार 2023 में 3.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2032 तक 6.93 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. डेयरी इंडस्ट्री करीब 14 लाख करोड़ रुपये की है.
इंडियन डेयरी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट और अमूल के पूर्व एमडी डॉ. आरएस सोढ़ी ने 'किसान तक' को बताया कि देश में संगठित डेयरी क्षेत्र का घी कारोबार करीब 50 हजार करोड़ रुपये का है. बाकी असंगठित क्षेत्र को मिला दें तो यह 3.5 से करीब 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचता है. करीब 1500 करोड़ रुपये का घी एक्सपोर्ट हो जाता है. लेकिन अगर हम घी के मामले में बाजार की कुछ नई स्ट्रेटेजी बनाने में कामयाब हो जाएं तो ये कारोबार दोगुना भी हो सकता है.
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