Breeder Bull Care: बहुत जरूरी है ब्रीडर बुल की खास तरीके से हो देखभाल, युवराज की मौत से उठे सवाल

Breeder Bull Care: बहुत जरूरी है ब्रीडर बुल की खास तरीके से हो देखभाल, युवराज की मौत से उठे सवाल

Breeder Bull Care 27 बार चैम्पियन रहे ब्रीडर बुल युवराज की मौत के बाद से कई सवाल खड़े हो गए. क्योंकि कृत्रितम गर्भाधान (AI) को बढ़ावा देने के लिए हर नस्ल के ब्रीडर सांड तैयार किए जा रहे हैं. एक ब्रीडर बुल तैयार करने पर लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं. अच्छी खुराक देने के साथ ही देखभाल की अच्छे लेवल पर की जाती है. 

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Breeder Bull Care: बहुत जरूरी है ब्रीडर बुल की खास तरीके से हो देखभाल, युवराज की मौत से उठे सवालप्रतीकात्मक फोटो.

एक अच्छा और क्वालिटी का ब्रीडर बुल बहुत मुश्किल से तैयार होता है. और जो तैयार होते हैं तो वो बेशकीमती होते हैं. ऐसे बुल की कोई कीमत नहीं होती है. ऐसे ही एक ब्रीडर बुल युवराज की मौत के बाद से बुल की देखभाल और खानपान को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. क्योंकि जिस युवराज को नौ करोड़ी कहा जाता था उसकी मौत कई सवाल छोड़ गई है. युवराज की मौत के बाद से ब्रीडर्स में हड़कंप मच गया है. सवाल ये भी हो रहा है कि जिसका खानपान अच्छा था, देखभाल में कोई कोताही नहीं बरती जाती थी, आखि‍र दो महीने के अंदर कैसे उस युवराज की मौत हो गई. हालांकि जानकार तो ये बताते हैं कि युवराज को नसों संबंधी कोई बीमारी हुई थी. 

ये एक ऐसा बुल था जो नेशनल और स्टेट लेवल की प्रतियोगिता मिलाकर करीब 27 बार चैम्पियन रहा था. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो कृत्रिम गर्भाधान (AI) को बढ़ावा देने के लिए हर नस्ल के ब्रीडर सांड तैयार किए जा रहे हैं. पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ओर से खानपान और रहन-सहन से संबंधित एडवाइजरी जारी की जाती हैं. क्योंकि साइंटीफिक होते पशुपालन में गाय-भैंस को गाभि‍न कराने का तरीका भी बदल गया है. 

ब्रीडर बुल की ऐसे करें देखभाल 

  • बाड़ा ऐसा हो जो सांड को सर्दी-गर्मी से बचाया जा सके. 
  • गर्भाधान का स्थान भैंसों के बाड़े से दूर होना चाहिए.
  • सांड का बाड़ा आरामदायक और बड़ा हो, जहां से वो दूसरे पशुओ को भी देख सके.
  • गर्भाधान के लिये सांड की उम्र कम से कम ढाई साल और वजन 350 किलोग्राम होना चाहिए.
  • कम उम्र के सांड को हफ्ते में दो या तीन बार ही ब्रीडिंग के लिए इस्तेमाल करना चाहिए.
  • दो गर्भाधान के बीच सांड को कम से कम एक दिन का आराम देना चाहिए. 
  • भैंस को ब्रीडर सांड के पास ले जाने से पहले उसकी योनि को पानी-कपड़े से साफ करना चाहिए.
  • ब्रीडर सांड का भैंस से संगम कराने के दौरान उसके साथ मारपीट नहीं करनी चाहिए.
  • सांड को प्रतिदिन कम से कम एक घंटा कसरत करानी चाहिए. 
  • सांड की हर रोज मालिश करने के बाद उसे नहलाना चाहिए. 
  • हर छह महीने के बाद सांड के खून की जांच करा लेनी चाहिए. 
  • समय-सयम पर सांड में ब्रुसेलोसिस समेत दूसरे यौन रोग जांच करानी चाहिए.
  • चार्ट के मुताबिक सांड का टीकाकरण कराते रहना चाहिए. 
  • एक्सपर्ट द्वारा बताई गई डाइट ही सांड को देनी चाहिए. 
  • खूंखार सांड से किसान की सुरक्षा का इंतजाम बाड़े में जरूर करें.

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