
आनलाइन प्लेटफार्म पर घी-मक्खन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है. बेचने वाले दावा करते हैं कि ये प्योर है और साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए तैयार किया गया है. साथ ही भरपूर फैट होने का दावा किया जाता है. अगर आप भी घी-मक्खन का आनलाइन कारोबार करना चाहते हैं तो ये जानकारी खास आपके लिए है. अगर डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो देश में घी-मक्खन का बड़ा बाजार है. डेयरी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट में भी सबसे ज्यादा मात्रा घी-मक्खन की ही होती है. हालांकि आनलाइन प्लेटफार्म पर गायों के दूध से बना घी-मक्खन ज्यादा बेचा जाता है. भैंसों के दूध से बना घी-मक्खन भी बिक रहा है.
देश में भैंसों की चार ऐसी नस्ल हैं जिनके दूध से बना घी-मक्खन बहुत अच्छा माना जाता है. स्वाद के साथ ही पौष्टियक भी खूब होता है. जैसे यूपी-एमपी में पाई जाने वाली भदावरी भैंस, गुजरात की जाफराबादी, यूपी-हरियाणा की मुर्रा और हरियाणा-पंजाब की नीली रावी नस्ल की भैंस के दूध में सबसे ज्यादा फैट पाया जाता है. फैट के मामले में पहले नंबर पर भदावरी भैंस है. जिस दूध में जितना ज्यादा फैट होगा उससे उतना ही बढि़या घी-मक्खन बनेगा.
भदावरी भैंस के दूध को फैट के मामले में नंबर वन माना जाता है. भदावरी भैंस यूपी में आगरा-इटावा और मध्य प्रदेश में भिड और मुरैना में पाई जाती है. इसके रंग के चलते भदावरी को भूरी भैंस भी कहा जाता है. डेयरी एक्सपर्ट के मुताबिक भदावरी भैंस के दूध में 8 से 13 फीसद तक फैट पाया जाता है. एक सरकारी विभाग की ओर से हुई रिसर्च में भी भदावरी भैंस के दूध में सबसे ज्यादा फैट होने की बात कही गई है.
दूध में फैट के मामले में भदावरी भैंस के बाद दूसरा नंबर जाफराबादी भैंस का आता है. जाफराबाद भैंस मूल रूप से गुजरात में पाई जाती हैं. डेयरी एक्सपर्ट के मुताबिक जाफराबादी भैंस के दूध में 7 से 9 फीसद तक फैट पाया जाता है. पालन में जाफराबादी भैंस को भी खूब पसंद किया जाता है.
मुर्रा नस्ल की भैंस से हर कोई वाकिफ है. मुर्रा भैंस देश में सबसे ज्यादा हरियाणा और यूपी में हैं, लेकिन आज कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु आदि बहुत सारे राज्यों में मुर्रा पाली जा रही हैं. मुर्रा के दूध को भी फैट के मामले में बहुत अच्छा माना जाता है. डेयरी एक्सपर्ट के मुताबिक मुर्रा के दूध में 7 से 8 फीसद फैट पाया जाता है.
नीली रावी नस्ल की भैंस का मूल स्थान तो पाकिस्तान में है, लेकिन भारत के पंजाब में इसे बड़ी संख्या में पाला जाता है. हरियाणा में भी नीली रावी की बहुत डिमांड रहती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि नीली रावी के दूध में 6 से 8 फीसद तक फैट होता है.
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