भैंस की टॉप 4 नस्लेंउत्पादन करने वाले पशुओ को खास खुराक की जरूरत होती है. एक जीवन निर्वाह के हिसाब से और दूसरी अच्छा उत्पादन करने के लिए. एनिमल न्यूट्रीशन एक्सपर्ट की मानें तो दोनों ही कंडीशन में गाय-भैंस ही नहीं भेड़-बकरियों को भी विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है. अगर पशुओं की रोजाना की खुराक में जरूरत के हिसाब से विटामिन और मिनरल्स दिए जा रहे हैं तो ऐसा करने से पशु का न तो गर्भपात होगा और न ही छोटी-बड़ी बीमारियां जल्द अपना असर दिखा पाएंगी. क्योंकि विटामिन की कमी से बहुत सारी बीमारियां हो जाती हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक पशुओं को ये विटामिन आमतौर पर हरे चारे से भरपूर मात्रा में मिल जाते हैं.
लेकिन इसके अलावा भी बीमारियों के हिसाब से पशुओं की खुराक में विटामिन शामिल किए जाते हैं. हरा-सूखा चारा, मिनरल मिक्चर और दाना उत्पादन करने वाले पशुओं के लिए बहुत जरूरी होता है. गाय-भैंस हो या भेड़-बकरी सभी की रोजाना की खुराक में इसका शामिल होना बहुत जरूरी है. इससे जहां पशु अच्छा उत्पादन करते हैं, वहीं उनकी खुद की हैल्थ भी अच्छी रहती है. यहां तक की दूध में फैट और एसएनएफ को बढ़ाने में भी मदद मिलती है.
पशु की दिनभर की सामान्य क्रियाशीलता (एक्टिाविटी) के लिए उसे कई तरह के विटामिनों की जरूरत पड़ती है. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि पशु को ये विटामिन आमतौर पर हरे चारे से भरपूर मात्रा में मिल जाते हैं. जैसे विटामिन बी पशु के पेट में मौजूद सूक्ष्म जीवाणुओं द्वारा पर्याप्त मात्रा में मिलता रहता है. दूसरे विटामिन जैसे ए, सी, डी, र्इ और के पशुओं को चारे और दाने से मिल जाते हैं. अगर विटामिन की कमी से होने वाली बीमारियों की बात करें तो विटामिन ए की कमी से भैंसो में गर्भपात हो जाता है, अंधापन, चमड़ी का सूखापन, भूख की कमी, हीट में न आना और गर्भ का न रूकना जैसी परेशानियां खड़ी हो जाती हैं.
खनिज लवण (मिनरल मिक्चर) खासतौर पर हड्डियों, दांतों की बनावट और उन्हें मजबूती देने के काम आता है. दूध में फैट और एसएनएफ बढ़ाने में भी मिनरल मिक्चर अहम रोल निभाते हैं. इनकी कमी से शरीर में कर्इ प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं. कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम, गंधक, मैग्निशियम, मैगनीज, लोहा, तांबा, जस्ता, कोबाल्ट, आयोडीन, सेलेनियम आदि पशु शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं.
दूध उत्पादन की हालत में भैंस को कैल्शियम और फास्फोरस की बहुत ज्यादा जरूरत होती है. प्रसूति काल में इसकी कमी से पशु को मिल्क फीवर भी हो सकता है. दूध उत्पादन भी घट सकता है. बच्चे देने की दर में भी कमी आ सकती है. कैल्शियम की कमी के चलते गाभिन भैंस फूल दिखा सकती है.
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