Poultry Feed and Ethanol: क्या पोल्ट्री में इस्तेमाल हो सकता है इथेनॉल प्लांट से निकला कचरा

Poultry Feed and Ethanol: क्या पोल्ट्री में इस्तेमाल हो सकता है इथेनॉल प्लांट से निकला कचरा

Poultry Feed and Ethanol मक्का महंगा होने से पोल्ट्री प्रोडक्ट अंडे-चिकन की लागत बढ़ रही है. पोल्ट्री फार्मर का आरोप है कि आज मक्का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी ऊंचे दामों पर बिक रही है. मक्का का इथेनॉल में इस्तेमाल होना भी एक बड़ी वजह है. लेकिन इसके साथ ही इथेनॉल प्लांट से निकलने वाले मक्का के कचरे में परेशानी का हल तलाशा जा रहा है. 

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Poultry Feed and Ethanol: क्या पोल्ट्री में इस्तेमाल हो सकता है इथेनॉल प्लांट से निकला कचराIn 2023, officials had called for a sharp rise in maize production to meet growing demand from ethanol and poultry sectors. (Photo-ICAR).

पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो पोल्ट्री में सबसे ज्यादा लागत करीब 60 फीसद फीड पर आती है. फीड में भी सबसे ज्यादा मक्का खि‍लाया जाता है. मक्का के रेट और मक्का की मौजूदा खपत से सभी अच्छी तरह वाकिफ हैं. इथेनॉल में भी मक्का इस्तेमाल हो रही है. जिसके चलते पोल्ट्री की लागत बढ़ गई है. ऐसे में पोल्ट्री फीड को लेकर जो चर्चाएं हो रही हैं उसमे एक बड़ा ही अहम सवाल उठ रहा है. सवाल ये है कि क्या पोल्ट्री फीड में इथेनॉल से निकल कचरे को शामिल किया जा सकता है. जैसे इथेनॉल बनाने में जो मक्का इस्तेमाल हो रही है उसका कचरा फीड में शामिल किया जा सके. पोल्ट्री से जुड़ी एक-दो बैठक और कार्यक्रम से निकला ये सवाल अब आम हो गया है.
 
क्योंकि पोल्ट्री सेक्टर से उठी मक्का की आवाज अब मंत्रालय के गलियारों में भी पहुंचने लगी है. डेयरी-पशुपालन मंत्रालय हो या कृषि‍, पोल्ट्री फीड में शामिल मक्का की चर्चा होने लगी है. वहीं पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (पीएफआई) के प्रेसिडेंट का कहना है कि इथेनॉल प्लांट का वेस्ट पोल्ट्री फीड में शामिल हो तो सकता है, लेकिन मुर्गियों की हैल्थ और अंडे-चिकन की क्वालिटी को बनाए रखने के लिए कुछ मानकों को पूरा करना होगा. अगर मानक पूरे नहीं किए जाते हैं तो इसका नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.   

इथेनॉल के कचरे में चाहिए ये मानक 

पीएफआई के प्रेसिडेंट रनपाल डाहंडा का कहना है कि मक्का पोल्ट्री फीड का अहम हिस्सा है. अगर इथेनॉल में इस्तेमाल होने वाली मक्का के कचरे (डीडीजीएस) को पोल्ट्री फीड में शामिल किया जाता है तो उसके लिए कुछ मानक है. उन मानक को पूरा करने पर ही इसका इस्तेमाल करने से फायदा होगा.

जैसे एफ्लाटॉक्सिन का लेवल 20 पीपीबी से कम होना चाहिए. वहीं नमी का लेवल भी 12 से कम ही होना चाहिए. अगर ये मानक पूरे किए जाते हैं तो फिर डीडीजीएस को इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं है. क्योंकि पोल्ट्री प्रोडक्ट अंडे-चिकन की क्वालिटी को बनाए रखना भी हमारा ही काम है. 

डिस्टिलर्स ने पोल्ट्री सेक्टर को दिया ऑफर 

पोल्ट्री से जुड़े जानकारों की मानें तो बीते साल ही डिस्टिलर्स एसोसिएशन के पोल्ट्री एक्सपर्ट की एक बैठक हुई थी. इसमे पीएफआई भी शामिल थी. एसोसिएशन ने इथेनॉल बनाने वाले प्लांट का दौरा करने का सुझाव दिया. पीएफआई के सुझावों की सराहना भी की थी. आखि‍र में ये भी तय हुआ था कि अगर डीडीजीएस निर्माता लगातार गुणवत्ता प्रदान करते हैं और उसे बनाए रखते हैं तो पोल्ट्री फीड में डीडीजीएस के इस्तेमाल की गुंजाइश बाकी है. 

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