ठंड में मेमनों को चाहिए प्यारआर्टिफिशल इंसेमीनेशन से बकरी को गाभिन कराने के एक नहीं कई फायदे हैं. गाभिन कराने का प्राकृतिक तरीका महंगा भी होता है. एआई का सबसे बड़ा फायदा ये है कि पशुओं की नस्ल सुधार में भी ये मददगार साबित होता है. लेकिन एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि आप सुविधानुसार बकरी को चाहें प्राकृतिक तरीके से गाभिन कराएं या एआई जैसे साइंटीफिक तरीके से, लेकिन जिस बकरे या उसके वीर्य का इस्तेमाल किया जा रहा है तो उसके बारे में पूरी जानकारी होना जरूरी है. केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा भी बकरी को साइंटीफिक तरीके से गाभिन कराने की सलाह देता है.
क्योंकि हर एक बकरी पालक की ये ख्वाहिश होती है बकरी के बच्चों की मृत्यु दर कम हो जाए. बच्चा हेल्दी हो ओर बीमारियों की चपेट में न आए. साथ ही बकरी भी बच्चा देने के बाद हेल्दी रहे और खूब उत्पादन करे. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि ब्रीडर बकरे के बारे में कुछ खास बातें जरूर जान लें. अगर इन बातों का ख्याल नहीं रखा तो बकरी का होने वाला बच्चा बीमार और कमजोर हो सकता है. जैसे ही बकरी हीट में आ जाए तो 24 से 30 घंटे के अंदर उसे गाभिन करा दें.
गोट एक्सपर्ट और सीआईआरजी के सीनियर साइंटिस्ट एमके सिंह का कहना है कि ब्रीडर बकरा आपके अपने गोट फार्म हाउस का हो या किसी और का, लेकिन इस बात की तस्दीक कर लेना बहुत जरूरी है कि ब्रीडर उस प्योर नस्ल का है या नहीं जिस नस्ल की बकरी है. वहीं इस बात की जांच भी कर लें कि ब्रीड के मुताबिक ब्रीडर बकरे में उसकी नस्ल के सारे गुण हैं कि नहीं. जैसे उसका रंग, उसकी हाइट, उसका वजन, उसके कान और शरीर की बनावट.
एमके सिंह बताते हैं कि ब्रीडर बकरे की फैमिली क्वालिटी से मतलब यह है कि जो ब्रीडर की मां है वो दूध कितना देती थी. उस बकरी से एक बार में कितने बच्चे होते थे. इतना ही नहीं जब ब्रीडर पैदा हुआ था तो उस वक्त कितने बच्चे दिए थे. ब्रीडर के पिता की हाइट कितनी थी. पिता की ग्रोथ रेट कैसी थी. ब्रीडर के दूसरे भाई-बहन कैसे हैं.
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