बिहार में मछली उत्पादन को मिला बढ़ावामत्स्य कृषि एवं इससे जुड़े हुए किसानों को लेकर बिहार में एक नए अध्याय की शुरुआत की गई. अब बिहार के किसानों को मछली के उत्पादन या इससे जुड़े हुए किसी भी तरह की जानकारी राजधानी पटना में आसानी से मिल सकेगी. क्योंकि राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी) हैदराबाद के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन सोमवार को राजधानी पटना के नवनिर्मित मत्स्य विकास भवन, मीठापुर में किया गया. क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन प्रदेश के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह द्वारा किया गया. वहीं, इस कार्यालय के राजधानी पटना में स्थापित होने के बाद मछली के क्षेत्र में केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूर्वी राज्यों के मत्स्य क्षेत्र में भी विकास तेजी से आएगा.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि बिहार जल संसाधनों से भरा है, जिसका परिणाम यह है कि जहां वर्ष 2024-25 में मत्स्य उत्पादन 9.5 लाख मीट्रिक टन था, वह बढ़कर वर्ष 2025-26 में 10.52 लाख मीट्रिक टन हो गया है. वहीं, हाल के समय में राज्य से करीब 89.62 हजार टन मछली देश के प्रमुख शहरों में भेजी जा रही है. अब एनएफडीबी हैदराबाद के क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना से राज्य के मत्स्य किसानों एवं उद्यमियों को लाभ मिलेगा.वहीं, उन्होंने कहा कि गांवों में हॉट मॉडल विकसित किए जाएंगे, जहां दूध, सब्जी और मछली की बिक्री एक साथ हो सकेगी.
प्रदेश के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पर्यटन के क्षेत्र में एक नई पहल शुरू करते हुए बताया कि जिन लोगों को पटना की यात्रा करनी हो, वे अब हेलीकॉप्टर से हवाई यात्रा मात्र ₹2100 में कर सकते हैं. इसकी शुरुआत अगले महीने 15 जुलाई से की जाएगी. इसके अलावा राजगीर, मुंडेश्वरी माता मंदिर, तुतला भवानी मंदिर, आसपास के जलप्रपात और वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व जैसे पर्यटन स्थलों की हेलीकॉप्टर यात्रा भी कराई जाएगी. इसके लिए प्रति व्यक्ति ₹6000 शुल्क निर्धारित किया गया है. वहीं, इन तमाम यात्राओं को लेकर राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है.
केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि बिहार मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बन चुका है, लेकिन केवल इससे काम नहीं चलेगा. अब हमें निर्यात पर भी विशेष जोर देने की जरूरत है. वहीं, उन्होंने कहा कि एनएफडीबी का क्षेत्रीय कार्यालय खुलने के बाद राज्य के मत्स्य क्षेत्र को एक नई और आधुनिक दिशा मिलेगी. इस कार्यक्रम के संचालन से बिहार सहित पूर्वी राज्यों के मत्स्यपालकों की समृद्धि का यह नया केंद्र भी बनेगा.
भोजपुर जिले के उदवंतनगर प्रखंड में 32 एकड़ भूमि पर 31.21 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क की आधारशिला मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रखी. इस परियोजना में कार्प हैचरी, बायोफ्लॉक यूनिट, आरएएस सिस्टम, प्रयोगशालाएं, प्रशिक्षण केंद्र और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना मत्स्य उत्पादन, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी. इसके साथ ही इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा. सरकार ने बिहार को मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और इसे निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है.
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