मुख्यमंत्री से राहत की मांग.(Photo: Screengrab)कोविड, स्वानइन फ्लू, एवियन इंफ्लूंजा का प्रकोप हम सभी देख चुके हैं. कोविड ने तो पूरे दो साल के लिए हमे नजरबंद कर दिया था. बाकी की बीमारियों को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है. इतना ही नहीं एशियन फ्लू, इबोला, जीका वायरस भी कम घातक नहीं हैं. लेकिन अब राहत की बात ये है कि इन सभी जानलेवा बीमारियों को कंट्रोल किया जा सकता है. इसमे ज्यादातर बीमारियां ऐसी हैं जो पशुओं और पक्षियों से इंसानों में आती हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक 1.7 मिलियन वायरस जंगल में फैले होते हैं. इसमे से बहुत सारे ऐसे हैं जो जूनोटिक हैं. जूनोटिक वो होते हैं जो पशु-पक्षियों से इंसान में फैलते हैं.
लेकिन अब वर्ल्ड लेवल पर ऐसे वायरस को कंट्रोल किया जा रहा है. भारत में नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) के नाम से शुरू हुए एक अभियान से इन पर काबू पाया जा रहा है. कोविड, इबोला, जीका वायरस, रैबीज और एवियन इंफ्लूंजा आदि जैसी महामारियों पर तीन लेवल से वार किया जाएगा. इसी के लिए NOHM मिशन शुरू किया गया है.
पशु-पक्षियों फिर चाहें जानवर जंगल का ही क्यों न हो से फैलने वाली महामारियों को रोकने के लिए NOHM मिशन शुरू किया गया है. इस मिशन में वर्ल्डं बैंक 50 फीसद का हिस्सेदार है. यह मिशन इंसान, घरेलू पशु और वाइल्ड लाइफ को ध्यान में रखते हुए चलाया जा रहा है. साथ ही इस मिशन में खासतौर पर हैल्थ मिनिस्ट्री, हमारा पशुपालन मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं. राज्यस्तर पर सभी संबंधित विभाग इस मिशन से जुड़े हुए हैं.
राजेश कुमार सिंह ने मिशन से जुड़े कार्यो की जानकारी देते हुए बताया कि मिशन के तहत सात बड़े काम किए जाएंगे. जिसमे पहले नंबर पर नेशनल और स्टेदट लेवल पर महामारी की जांच को संयुक्त टीम बनेगी. महामारी फैलने पर संयुक्तं टीम रेस्पांस करेगी.
नेशनल लाइव स्टॉक मिशन की तरह से सभी पशुओं के रोग की निगरानी का सिस्टम तैयार किया जाएगा.
मिशन के रेग्यूलेटरी सिस्टम को मजबूत बनाने पर काम होगा. जैसे नंदी ऑनलाइन पोर्टल और फील्ड परीक्षण दिशा निर्देश हैं.
महामारी फैलने से पहले लोगों को उसके बारे में चेतावनी देने के लिए सिस्टम बनाने पर काम होगा.
नेशनल डिजास्टर मैंनेजमेंट अथॉरिटी के साथ मिलकर जल्द से जल्द महामारी की गंभीरता को कम करना.
प्राथमिक रोगों के टीके और उसका इलाज विकसित करने के लिए तय अनुसंधान कर उसे तैयार करना.
रोग का पता लगाने के तय समय और संवेदनशीलता में सुधार के लिए जीनोमिक और पर्यावरण निगरानी फार्मूले तैयार करना जैसे काम होंगे.
ये भी पढ़ें:
Milk Production: गाय-भैंस के बच्चा देने के बाद इन 5 कारणों से कम हो सकता है दूध उत्पादन
EL-Nino: डेयरी-पशुपालन पर बढ़ा अल नीनो का खतरा, कम हो सकता है दूध उत्पादन!
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today