Dairy Milk: डेयरी कोऑपरेटिव से जुड़कर ही पशुपालकों को मिलेगा दूध का सही दाम-अमित शाह

Dairy Milk: डेयरी कोऑपरेटिव से जुड़कर ही पशुपालकों को मिलेगा दूध का सही दाम-अमित शाह

नेशनल डेयरी डपलवमेंट बोर्ड (NDDB) के हीरक जयंती समारोह में बोलते हुए केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा है कि डेयरी किसानों की हालत को सुधारने के लिए केन्द्र सरकार की कोशि‍श होगी की सभी को डेयरी कोऑपरेटिव से जोड़ा जाए. उन्हें दूध का पूरा पैसा मिले. इसके लिए सरकार दो लाख नई प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS)बनाने जा रही है जो हमारे कोऑपरेटिव के ढांचे को मजबूत करेगी. 

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Dairy Milk: डेयरी कोऑपरेटिव से जुड़कर ही पशुपालकों को मिलेगा दूध का सही दाम-अमित शाहएनडीडीबी के कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने डेयरी किसानों को डेयरी कोऑपरेटिव से जोड़ने की बात कही है.

केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने दूध के दाम को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. मंगलवार को आनंद, गुजरात में नेशनल डेयरी डपलवमेंट बोर्ड (NDDB) का हीरक जयंती समारोह के मौके पर उन्होंने ये बयान दिया है. इस मौके पर केन्द्रीय डेयरी और पशुपालन मंत्री राजीव रंजन उर्फ लल्लन सिंह भी मंच पर मौजूद थे. शाह का कहना है कि देशभर में आठ करोड़ परिवार दूध उत्पादन के काम से जुड़े हैं. इसमे से करीब डेढ़ करोड़ परिवार ही डेयरी कोऑपरेटिव से जुड़े हुए हैं. इसका सीधा सा मतलब है कि बाकी के 6.5 करोड़ परिवारों को दूध का सही दाम नहीं मिल पा रहा है. उनका शोषण हो रहा है.

उन्होंने बताया कि दूध उत्पादन के मामले में हमारा देश पहले नंबर पर है और अमेरिका जैसा देश पीछे छूटा हुआ है. आज विश्व में दूध उत्पादन दो फीसद की दर से बढ़ रहा है, जबकि हमारा देश छह फीसद की दर से बढ़ रहा है. हमने बीते साल 23 करोड़ टन दूध का उत्पादन किया था, जो विश्व के कुल दूध उत्पादन का करीब 24 फीसद है.  

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अमित शाह ने बताया कैसे बना था NDDB

समारोह के दौरान अमित शाह ने NDDB के बारे में बोलते हुए बताया कि NDDB ने ग्रामीण क्षेत्र के साथ ही देश के विकास को गति देने का काम किया है. इतना ही नहीं कृषि में भी लोगों को अत्मनिर्भर बनाने का काम लगातार चल रहा है. उन्होंने कहा कि त्रिभुवन पटेल ने NDDB की नींव रखी थी जो आज देश के साथ ही विश्व की बड़ी संस्था बन गई है. 1987 में ये एक संस्था बना और 1970 से 1996 तक ऑपरेशन फ्लड योजना बनाने और इसे लागू करने का काम किया. शाह ने कहा कि 1964 में जब लाल बहादुर शास्त्री ने NDDB की स्थापना का निर्णय लिया तब किसी को नहीं पता था कि एक दिन यह बीज इतना  बड़ा वटवृक्ष बनेगा. NDDB की आज तरल दूध की बिक्री 427 लाख लीटर प्रति दिन है. और रेवेन्यू की बात करें तो 344 करोड़ रूपए से बढ़कर 426 करोड़ रूपए पर पहुंच गया है. जबकि शुद्ध मुनाफा 50 करोड़ रूपए है.

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पूरी दुनिया खाएगी भारत की सब्जी

अमित शाह बताया कि NDDB ने सब्ज़यों की प्रोसेसिंग भी शुरू कर दी है. इसके चलते हमारे किसानों की उगाई सब्जियां पूरी दुनिया में जाएंगी और इसका मुनाफा कोऑपरेटिव मॉडल के तहत नीचे तक हर एक किसान के पास पहुंचेगा. साथ ही उन्होंने बताया कि गोबरधन योजना से हमारी भूमि का संरक्षण और संवर्धन हुआ है, उपज बढ़ी है, किसान की समृद्धि बढ़ी है और पर्यावरण भी साफ हो रहा है. गोबर से गैस, खाद बन रही है. शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने दूरदर्शी निर्णय लेकर गोबरधन योजना को जमीन पर उतारने का काम किया है. उन्होंने कहा कि NDDB ने 10 हजार  किसान उत्पाद संगठन (FPO) भी पंजीकृत किए हैं.

 

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