सीएम से मुलाकात के बाद खत्म हुई वेटनरी डॉक्टर्स की हड़ताल. फोटो- DIPRराजस्थान में मौसम चुनावों का है. ऐसे में हर वर्ग चाहता है कि आचार संहिता से पहले उनकी लंबित मांगें पूरी हो जाएं. इसीलिए बीते 18 सितंबर से राजस्थान में वेटनरी डॉक्टर्स एनपीए की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे. अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात के बाद पशुचिकित्सकों ने हड़ताल खत्म कर दी है. राजस्थान पशु चिकित्सा कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष अजय सैनी ने किसान तक को बताया कि हमारी सबसे बड़ी मांग एनपीए की थी.
जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकार कर लिया है. कहा कि अगले कुछ दिनों में ही यह काम कर दिया जाएगा. इसीलिए अब हमारी हड़ताल भी खत्म हो गई है.
वेटनरी डॉक्टर एसोसिएशन के मीडिया इंचार्ज डॉ. नरेन्द्र जाखड़ इस बारे में किसान तक को विस्तार से बताते हैं. वे कहते हैं, “ड्यूटी के अलावा जो काम सरकार वेटनरी डॉक्टर्स से कराती है, वे एनपीए यानी नॉन प्रेक्टिस अलाउंस के दायरे में आते हैं. इसीलिए एनपीए वेटनरी डॉक्टर्स का हक है.
डॉक्टर प्रदेश में बीते 20 साल से एनपीए की मांग कर रहे हैं. लेकिन इनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही थी. इसीलिए नॉन प्रैक्टिस अलाउंस (NPA) की मांग को लेकर पशुचिकित्सक 18 सितंबर से पूर्ण बहिष्कार पर चले गए. अब जब खुद सीएम ने एनपीए देने का आश्वासन दे दिया है तो हमने हड़ताल वापस ले ली.
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पशु चिकित्सकों की हड़ताल से राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना संकट में आ गई थी. हड़ताल के दौरान प्रदेश के वेटनरी डॉक्टर्स ने मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना का बहिष्कार कर दिया था. वे 18 सितंबर से कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर थे. इससे ना तो कहीं दुधारू पशुओं का बीमा हो पा रहा था और ना ही पशुओं का इलाज हो पाया था. पशु चिकित्सक नॉन प्रेक्टिस अलाउंस की मांग लंबे वक्त से कर रहे हैं.
डॉक्टरों की नाराजगी के चलते राजस्थान सरकार की ढोल-बाजों के साथ शुरू की गई योजना जमीन पर नहीं उतर पाई. मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना के तहत प्रदेश में करीब 80 लाख दुधारू पशुओं का बीमा होना है. लेकिन मिली जानकारी के अनुसार हड़ताल के कारण अब तक सिर्फ 500 पॉलिसी ही हो पाई हैं. यह तब है जब योजना के लिए वित्त विभाग ने 300 करोड़ रुपये जारी कर दिए. लेकिन पशुपालकों को अब तक इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा.
अब जब वेटनरी डॉक्टर्स की हड़ताल खत्म हो गई है तो उम्मीद की जा सकती है कि जल्द इस योजना का लाभ आम पशुपालकों को मिलने लगेगा.
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सीएम गहलोत ने वेटनरी एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल से कहा कि राज्य सरकार पशु चिकित्सकों सहित राज्य कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. सरकार ने कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम लागू की है. साथ ही पशु चिकित्सा संबंधी अध्ययन के लिए राज्य में बड़े स्तर पर वेटनरी कॉलेज और जोबनेर में वेटनरी यूनिवर्सिटी खोली है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालकों के लिए मुख्यमंत्री कामधेनु बीमा योजना वरदान साबित हुई है. प्रति परिवार दो दुधारू पशुओं का 40-40 हजार रुपए का बीमा करने से पशुपालकों को सम्बल मिला है.
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