
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के बीच मौसम से जुड़ी गतिविधियां भारत के लिए मिश्रित संकेत दे रही हैं. एक तरफ प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान उस स्तर को पार कर गया है, जिसे अल नीनो की शुरुआत का संकेत माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ हिंद महासागर में बनने वाली परिस्थितियां आने वाले महीनों में भारत के लिए राहत लेकर आ सकती हैं. ऑस्ट्रेलिया के मौसम ब्यूरो की ताजा निगरानी रिपोर्ट के अनुसार 7 जून 2026 तक नीनो 3.4 क्षेत्र का तापमान विचलन +0.81 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो अल नीनो की सामान्य सीमा +0.80 डिग्री सेल्सियस से थोड़ा ऊपर पहुंच गया है. यह संकेत देता है कि उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर लगातार गर्म हो रहा है और आने वाले महीनों में यह प्रवृत्ति आगे भी बनी रह सकती है.
वहीं, दूसरी तरफ हिंद महासागर डाइपोल यानी IOD अभी तटस्थ स्थिति में बना हुआ है. 7 जून तक इसका सूचकांक -0.34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि जून से अगस्त तक स्थिति सामान्य रह सकती है, लेकिन अगस्त-सितंबर के दौरान पॉजिटिव IOD विकसित होने की संभावना बन रही है. यही संभावना भारत के मॉनसून के लिए राहत की वजह मानी जा रही है.
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पॉजिटिव IOD की स्थिति बनने पर हिंद महासागर से भारत की ओर नमी का प्रवाह बढ़ सकता है. ऐसे वर्षों में कई बार अल नीनो का असर कुछ हद तक कमजोर पड़ जाता है और मॉनसून को सहारा मिलता है. इसी वजह से इस बार मौसम वैज्ञानिक दोनों संकेतकों पर एक साथ नजर बनाए हुए हैं.
यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य समय से तीन दिन की देरी से 4 जून को पहुंचा और शुरुआती चरण में इसकी गति कमजोर रही है. हाल के आकलनों के अनुसार, मॉनसूनी बारिश सामान्य औसत से नीचे बनी हुई है. ऐसे में आने वाले हफ्तों में हिंद महासागर की गतिविधियां बारिश के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो बनने की संभावना बढ़ी जरूर है, लेकिन इसकी तीव्रता को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है. कई वैश्विक मॉडल कम से कम मध्यम स्तर के अल नीनो की संभावना जता रहे हैं, जबकि कुछ मॉडल परिस्थितियां अनुकूल रहने पर इसके और मजबूत होने का संकेत भी दे रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्री तापमान के साथ अब वायुमंडलीय संकेतों में भी बदलाव दिखाई देने लगा है. साउदर्न ऑसिलेशन इंडेक्स नकारात्मक क्षेत्र में बना हुआ है और प्रशांत क्षेत्र की व्यापारिक हवाएं सामान्य से कमजोर दर्ज की गई हैं. हालांकि, बादलों के पैटर्न में अभी स्थायी बदलाव नहीं दिखा है, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि समुद्र और वायुमंडल के बीच वह प्रक्रिया शुरू हो रही है जो आगे चलकर अल नीनो को स्थापित कर सकती है.
मौसम एजेंसी का मानना है कि जून से सितंबर के बीच समुद्री और वायुमंडलीय संकेतों में होने वाले बदलाव तय करेंगे कि भारत को अल नीनो का दबाव ज्यादा झेलना पड़ेगा या पॉजिटिव IOD मॉनसून के लिए संतुलन बनाने में सफल रहेगा. फिलहाल अगस्त और सितंबर की स्थिति पर नजर बनी हुई है.