
असम में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है. राज्य में अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है और 7.21 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं. बाढ़ के पानी में 25,375.44 हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि डूब गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है. 11 जिलों के सैकड़ों गांव जलमग्न हैं, जबकि हजारों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका है.
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में छह और लोगों की मौत हुई है. इनमें चार मौतें शिवसागर जिले और दो मौतें चराइदेव जिले में दर्ज की गईं. इसके साथ ही इस वर्ष बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 47 हो गई है. प्राधिकरण के मुताबिक, बाढ़ से 11 जिलों के 37 राजस्व सर्किल और 883 गांव प्रभावित हैं. गोलाघाट, होजाई, कामरूप, चराइदेव, जोरहाट, डिब्रूगढ़, शिवसागर, नगांव, कामरूप (मेट्रो), कार्बी आंगलोंग और तिनसुकिया जिले सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को कहा कि अभी भी लगभग 70 से 80 लोग लापता हैं. उन्होंने आशंका जताई कि मृतकों की संख्या आगे बढ़ सकती है, क्योंकि कई इलाकों में बचाव दल अब भी लोगों की तलाश में जुटे हैं. ASDMA के अनुसार, शिवसागर सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहां लगभग 3.75 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं. इसके बाद चराइदेव में 1.86 लाख और जोरहाट में लगभग 1.15 लाख लोग प्रभावित हैं.
राज्यभर में 103 राहत शिविर खुले हुए हैं, जहां 24,124 विस्थापित लोगों को ठहराया गया है. इसके अलावा 255 राहत वितरण केंद्र भी संचालित हैं, जहां प्रभावित परिवारों को खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. बाढ़ के कारण 25,375.44 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है. इससे खरीफ फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है और किसानों की चिंता बढ़ गई है. आधिकारिक आकलन के अनुसार, बड़ी संख्या में पशुधन भी बाढ़ से प्रभावित हुआ है.
यूरोपीय संघ के कॉपरनिकस अर्थ ऑब्जर्वेशन कार्यक्रम और सेंटिनल-1 रडार से प्राप्त सैटेलाइट तस्वीरों में ब्रह्मपुत्र घाटी में बाढ़ का व्यापक फैलाव दिखाई दिया है. जोरहाट के पास बाढ़ से प्रभावित जलक्षेत्र लगभग 21 किलोमीटर तक फैलता नजर आया, जो पहले की तुलना में करीब तीन गुना अधिक है.
बाढ़ के पानी ने नदी की मुख्य धारा के साथ रेत के टापुओं, कृषि क्षेत्रों और आसपास की बस्तियों को भी अपनी चपेट में ले लिया.भारतीय मानव बस्तियां संस्थान (IIHS) के ग्लोबल फ्लड मैपर के अनुसार, ब्रह्मपुत्र घाटी के बड़े हिस्से में बाढ़ का पानी फैला हुआ है. यह आकलन सेंटिनल-1 रडार की बाढ़ से पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना के आधार पर तैयार किया गया है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, ऊपरी असम और आसपास के पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई अत्यधिक बारिश ने हालात गंभीर बना दिए. अध्ययन अवधि के दौरान चराइदेव में 170 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 436 प्रतिशत अधिक रही. गोलाघाट में 147.9 मिमी, जोरहाट में 105.2 मिमी और शिवसागर में 93.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई. लगातार हुई बारिश के कारण दिखौ, दिसांग और जांजी जैसी सहायक नदियां भी उफान पर आ गईं, जिससे पानी गांवों, चाय बागानों और कृषि क्षेत्रों तक फैल गया.
ASDMA के अनुसार, बुरहीदिहिंग नदी ख्वांग, दिखो नदी शिवसागर, दिसांग नदी नंगलामुराघाट, धांसिरी नदी नुमालीगढ़ और कुशियारा नदी श्रीभूमि में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. दिसांग नदी नंगलामुराघाट में अपने पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर को भी पार कर चुकी है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 30 जुलाई तक असम और मेघालय के कई हिस्सों में भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है. इसके चलते पहले से जलमग्न क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर होने की आशंका बनी हुई है. (बिदिशा साहा की रिपोर्ट एजेंसी इनपुट के साथ)